कुरुक्षेत्र। इस बार ब्रह्मसरोवर पर सूर्यग्रहण में मोक्ष की डुबकी लगाने वाले घाटों पर लगाये गये बैरिकेड की वजह से परिक्रमा ना कर सकें, मगर अब यह मामला हरियाणा राजभवन और मुख्यमंत्री के दरबार में जरूर उठेगा। इसकी पुष्टि केडीबी के एक उच्चाधिकारी ने की। यह पहली बार हुआ है जब ब्रह्मसरोवर के घाटों की परिक्रमा में चारों और अलग अलग हिस्सों में पत्थरों को तोड़ कर यहां बल्लियां गाड़ दी गई और बल्लियों से बैरिकेड बनाकर इन्हें बंद कर अलग - अलग सेक्टरों में बांट दिया गया।
इस मामले को 25 दिसंबर के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया है। उसी के बाद कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने सरोवर के पत्थर तोड़ कर बैरिकेड बनाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। यह शिकायत कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष एवं हरियाणा के राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री को भी की है। मेला स्थल केडीबी की संपत्ति है और यहां किसी भी तरह की गतिविधि के लिये बोर्ड की ओर से मंजूरी दी जाती है।
अंग्रेजों ने भी निभाई तीर्थ मर्यादा
महाभारतकाल से भी पुराने ब्रह्मसरोवर का तत्कालीन राजा और ब्रिटिश हुकूमत ने भी संरक्षण और जीर्णोद्धार किया था। जिसका उल्लेख कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे और गुलजारी लाल नंदा ने किया है। उनके प्रयासों से ही चार किलोमीटर क्षेत्रफल को नया स्वरुप मिला था।
करोड़ों के खर्चे में से स्थायी मोबाइल बैरिकेड क्यों नहीं खरीदे
मेले में अधिकारियों के लिये पहली बार लाखों रुपये खर्च करके अलीशान प्रसासनिक खंड बनाया गया है। विदेशी तकनीक के हंगर (टेंट ) के अंदर भी पगोड़े (शामियाने) बनाये गये हैं,इनमें स्टैडिंग हीटर लगे हैं,डाइनिंग टेबल,सोफे और दूसरे सुुविधा के साधन यहां जुटाए गये हैं,वो भी केवल दो दिन के लिये। हद यह है कि ऐसे अनेक खर्चे मेले के नाम पर हो रहे हैं तो स्थाई बैरिकेड क्यों नहीं खरीदे,जबकि स्थाई बैरिकेड खरीदने से गीता जयंती और सूर्यग्रहण जैसे अवसरों पर इनका सदुपयोग होता। स्थाई मोबाइल बैरिकेड (टायर वाले)खरीदने पर नई बनाई गई सड़के और ब्रह्मसरोवर के पत्थरों में गड्डे नहीं खोदने पड़ते। बता दें कि ब्रह्मसरोवर के साथ साथ मेला क्षेत्र में बनाई गई नई सड़कों में गड्डे खोद कर वहां भी बल्लियां लगाई गई हैं।