संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि शालाक्य तंत्र आयुर्वेद का वह महत्वपूर्ण विभाग है जिसके अंतर्गत कान, नाक, गला एवं नेत्र संबंधी रोगों का निदान और उपचार किया जाता है। सतत चिकित्सा शिक्षा जैसे कार्यक्रम चिकित्सकों और शोधार्थियों को नवीनतम ज्ञान उपलब्ध कराने के साथ-साथ परंपरागत आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय का अवसर भी प्रदान करते हैं।
विश्वविद्यालय में सोमवार को कर्णनाद, नकसीर और आंखों की जांच पर विशेष व्याख्यान में उन्होंने आह्वान किया कि विशेषज्ञों की ओर से साझा किए गए अनुभवों और शोध निष्कर्षों का गंभीरता से अध्ययन करें और उन्हें व्यावहारिक चिकित्सा में प्रभावी ढंग से लागू करें, ताकि रोगियों को अधिकतम लाभ पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन चिकित्सा क्षेत्र में गुणवत्ता, शोध और व्यावहारिक दक्षता को नए आयाम प्रदान करते हैं। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. जितेश कुमार पंडा, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, शालाक्य तंत्र विभाग की चेयरपर्सन प्रो. आशु, प्रो. मनोज तंवर, प्रो. रविराज, प्रो. कृष्ण कुमार, प्रो. रविंद्र अरोड़ा और प्रो. दीप्ति पराशर और प्रो. नीलम समेत अन्य मौजूद रहे।
लंबे समय तक इयरफोन का इस्तेमाल घातक : प्रो. भारद्वाज
कार्यक्रम के पहले सत्र में राजीव गांधी राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज पपरोला के शालाक्य तंत्र विभागाध्यक्ष प्रो. बिज्यंत भारद्वाज ने कर्णनाद विषय पर बताया कि आजकल लंबे समय तक इयरफोन का इस्तेमाल करने वाले युवाओं में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। इसके अलावा मानसिक रोग, अवसाद, आघात और एनीमिया भी इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में कर्णपूर्ण, बस्ति और औषधीय उपचार से कर्णनाद के मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। अपने दूसरे सत्र में प्रो. भारद्वाज ने नाक से खून बहने (एपिस्टैक्सिस) पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह समस्या प्रायः आघात, ट्यूमर और उच्च रक्तचाप के कारण उत्पन्न होती है। समय रहते पहचान और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
ओसीटी तकनीक से मधुमेह पीड़ित रोगियों की आंखों की गहन जांच संभव : प्रो. मनोज
कार्यक्रम के विशेष तकनीकी सत्र में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शालाक्य तंत्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार ने आंख के पर्दे की जांच पर बताया कि ओसीटी तकनीक से मधुमेह पीड़ित रोगियों की आंखों की गहन जांच संभव है। इससे रेटिना में सूजन, काला मोतिया और रक्तस्राव जैसी स्थितियों का सटीक निदान किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्लिट लैंप परीक्षण तकनीक की उपयोगिता और प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक, विद्यार्थी और शोधार्थी शामिल हुए और विशेषज्ञों से आधुनिक व आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय के बारे में जानकारी प्राप्त की।
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष व्याख्यान में संबोधन देते कुलपति प