कुरुक्षेत्र। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्कृति बोध परियोजना के अखिल भारतीय संयोजक दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने कहा कि वर्तमान समय में छात्रों में संस्कृति बोध की नितांत आवश्यकता है। जैसा उनका बोध होगा, वैसा उनका जीवन व्यवहार बनेगा।
इससे पूर्व के सत्र में दुर्ग सिंह ने प्रश्नपत्र एवं प्रश्न मंच के लिए समूह निर्माण किया और प्रश्नपत्र निर्माण संबंधी सावधानियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने तैत्तरीय उपनिषद में वर्णित आख्यान हमारा शरीर और राष्ट्र रूपी शरीर की तुलना का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र रूपी शरीर के दो प्रकार के सेवक हैं। पहले प्रकार के सेवक वह हैं जो कुछ समय काम करके थकने के बाद विश्राम करते हैं और दूसरे वे जो सेवा करने के बदले में प्रसन्नता, पद, धन आदि कुछ न कुछ प्राप्त करते हैं। इस मौके पर संस्थान के निदेशक डाॅ. रामेंद्र सिंह सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।