जिले के कई स्कूलों में नाबालिग स्कूलों में वाहन लेकर पहुंच रहे हैं, जबकि उनके पास वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस तो दूर की बात है, उन्हें यातायात नियमों का भी ज्ञान नहीं है। स्कूलों की छुट्टी के समय इनके स्टंट प्रत्येक स्कूल के बाहर दिखाई दे जाएंगे, मगर इन्हें रोकने के लिए स्कूल प्रशासन भी आगे नहीं आ रहा।
जानकारी के अनुसार शहर में 60 से ज्यादा सरकारी व निजी स्कूल हैं, जिनमें हजारों विद्यार्थी निजी वाहन लेकर पहुंचते हैं। निजी वाहन पर स्कूल आने का एक मुख्य कारण स्कूल बसों की फीस ज्यादा होना भी है। अभिभावक इतनी फीस देने की बजाए वाहन देकर बच्चों को स्कूल भेज देते हैं। अभिभावक समय नहीं है, बच्चों की स्कूल वैन की फीस अधिक है, ट्यूशन आने-जाने में घंटों बर्बाद होते हैं और नाबालिगों की जिद, न जाने ऐसे कितने ही बहाने बनाकर भी अपने बच्चों के हाथ में मोटरसाइकिल-स्कूटी का हैंडल थमा रहे हैं। नाबालिग वाहन चालक खुद के लिए भी और दूसरों के लिए भी हादसों का कारण बन रहे हैं। इस बारे में न अभिभावक सजिंदा है और न ही स्कूल प्रशासन ध्यान दे रहा है। स्कूल संचालकों का तर्क है कि वे स्कूल में केवल उन्हीं विद्यार्थियों को वाहन लाने की अनुमति देते हैं, जिनके पास लर्निंग लाइसेंस है, लेकिन लाइसेंस के बिना वाहन चला रहे किशोरों की संख्या लाइसेंसशुदा किशोरों से काफी अधिक है। ऐसे में स्कूलों के बाहर नाबालिगों के वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं और छुट्टी होने पर यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
बच्चों की जिद्द के आगे अभिभावक लाचार
अभिभावक सुनील कुमार ने बताया कि बच्चे जब ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षा में हो जाते हैं तो अभिभावक बच्चों को दोपहिया वाहन उपलब्ध करा देते हैं। ऐसा नहीं कि अभिभावकों को इसके नुकसान के बारे नहीं पता, मगर बच्चों की जिद या ट्यूशन के चलते उन्हें अपने बच्चों को वाहन लेकर ही देना पड़ता है। यह जानते हुए कि यह बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, मगर दूसरा विकल्प तलाशने की कोशिश करने के बजाए उन्हें स्वयं ही वाहन चलाने देते हैं।
नाबालिग तेज रफ्तार से दौड़ा रहे वाहन
पूर्व सूबेदार मेजर व अभिभावक रविंद्र कौशिक ने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के हाथ तब तक वाहन नहीं देना चाहिए जब तक बच्चे बालिग न हो जाएं और यातायात नियमों के प्रति जागरूक न हो जाएं। उन्होंने बताया कि 12 से 18 साल की उम्र बहुत कच्ची होती है। नाबालिगों में इस उम्र में काफी जोश और जुनून होता है। अभिभावक बच्चों को वाहन खरीद कर दे देते हैं और बच्चे उसे इतनी तेज रफ्तार से दौड़ातेे है,जिससे वह अपने साथ-साथ दूसरों की जान भी खतरे में डाल देते हैं। उन्होंने कहा कि वे जागरूक युवा, जागरूक समाज अभियान चलाकर अब तक कई स्कूलों में बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर चुके हैं। वे स्कूल में बच्चों को हमेशा एक ही बात कहते हैं तुम्हारी जिंदगी सिर्फ तुम्हारी नहीं तुम्हारे माता-पिता की भी है।
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नाबालिग वाहन चलाता मिला तो होगा चालान
यातायात प्रभारी इंस्पेक्टर रामकरण ने कहा कि पुलिस प्रशासन की ओर से स्कूलों में विद्यार्थियों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान जारी है। जल्द ही स्कूलों के बाहर नाके लगाए जाएंगे। छुट्टी के बाद जो भी नाबालिग वाहन चलाता पाया गया चालान किया जाएगा। इतना ही नहीं स्कूल संचालकों से भी कहा जाएगा कि वे बच्चों को वाहन लाने से रोकें।