कुुरुक्षेत्र। सांप को देखते ही हम सिंहर जाते हैं। न केवल उससे बचने बल्कि मारने का भी प्रयास किया जाता है। इसी बीच मनाई जाने वाली नाग पंचमी को हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है तो वहीं दूध पिलाने की परंपरा भी है। ऐसे में सांपों को लेकर हर किसी के मन मे कौतुहल बना रहता है।
वन्य प्राणी विभाग के विशेषज्ञों की मानें तो हर सांप हमारा दुश्मन नहीं होता। कुछ जहरीले तो इंसान पर हमलावर भी होते हैं लेकिन कुछ हमारे मित्र भी होते हैं। कईं प्रकार के सांप को किसानों की फसल के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। ऐसे सांप न तो हमला करते और न ही उनके अंदर कोबरा की तरह जहर होता।
विभाग के कर्मी सुभाष ढुल बताते हैं कि जिला में कोई भी कोबरा सांप नहीं है। कोबरा हो ही नाग कहा जाता है। वहीं सामान्य श्रेणी के सांप हर क्षेत्र में मिल सकते हैं। इस क्षेत्र में रैक किस्म के सांप ही ज्यादातर पाए जाते हैं जबकि कॉमन करेट कहा जाने वाला कोबरा कभी कभार ही दिखाई दिया है। वहीं बुल किस्म के साथ-साथ पानी में रहने वाल सांप ज्यादा खतरनाक नहीं होते। संवाद