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केयू वीसी के खिलाफ श्री ब्राह्मण सभा लामबंद

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। वामन द्वादशी पर अवकाश घोषित न करने पर केयू प्रशासन के प्रति श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा में रोष गहरा गया है। सभा ने कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा पर आरोप लगाए हैं कि ढाई दशक पुरानी व्यवस्था को बहाल करने में नजरंदाजी है। ऐसे में उनकी कार्यप्रणाली को लेकर ब्राह्मण समाज में गहरा रोष है। श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा का एक शिष्टमंडल शीघ्र ही यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति एवं राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय को मिलेगा।
सभा के मुख्य सलाहाकार जयनारायण शर्मा का कहना है कि विश्वविद्यालय में प्रारंभ से ही सोमवती अमावस्या, वामन द्वादशी जैसे प्रमुख अवसरों पर आधा दिन का अवकाश करने की व्यवस्था थी। वामन द्वादशी का आयोजन किन्हीं कारणों से करीब 25 वर्षों से बंद पड़ा था, गत वर्ष श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा द्वारा इस मेले का पुनर्जागरण किया गया था। इस विषय को लेकर सभा ने विश्वविद्यालय के कुलपति लिखित में प्रार्थना की थी कि वामन द्वादशी के अवसर पर पुरानी व्यवस्था को बहाल करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आधा दिन का अवकाश शुरु किया जाए। सभा के मुख्य सलाहकार के मुताबिक सभा द्वारा भेजे गए पत्र के जवाब में कुलपति या केयू प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
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केयू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डा. बाबूराम गुप्ता का कहना है कि वामन द्वादशी जैसे अवसरों पर कुंटिया की मांग पर केयू प्रशासन ने पहली बार आधा दिन के अवकाश की व्यवस्था सुनिश्चित की थी,ताकि कर्मचारी इन धार्मिक आयोजनों में भाग ले सकें। वहीं केयू के पूर्व कुलसचिव रजिस्ट्रार पद्मश्री डा.र ाघवेंद्र तंवर का कहना है कि केयू प्रशासन द्वारा वामन द्वादशी जैसे प्रमुख अवसरों पर अर्धावकाश की व्यवस्था रही है। पूर्व रजिस्ट्रार रमेश शर्मा ने माना कि श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा द्वारा जो मांग की थी, उसे केयू कुलपति को गंभीरता से लेते अर्धावकाश की घोषणा आयोजन से पहले करनी चाहिए थी।
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प्रो. सिन्हा ने कुलपति के रवैए पर जताया अफसोस
केयू दर्शन शास्त्र एवं भारतीय संस्कृति विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रो. डा. हिम्मत सिंह सिन्हा ने कुलपति के नकारात्मक रहे रवैये पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा है कि पहले कुरुक्षेत्र की भूमि पर नियुक्त होकर आने वाले व्यक्ति धार्मिक प्रवृत्ति के होते थे और वह इस धरा के रीति रिवाज और धर्म परंपराओं को महत्व देते थे और इसलिए वामन द्वादशी तथा सोमवती अमावस्या जैसे मुख्य अवसरों पर आधा दिन के अवकाश की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी।
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