कुरुक्षेत्र। नेशनल हाईवे पर पिपली में खड़ी एंबुलेंस। संवाद
कुरुक्षेत्र। जिले से गुजरने वाले तीन नेशनल हाईवे और चार स्टेट हाईवे पर दुर्घटना के बाद घायलों को एंबुलेंस की सुविधा मिल रही है लेकिन कई बार मरीजों को ईएमटी की कमी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
प्रशासन के पास पर्याप्त मात्रा में ईएमटी नहीं है। अक्सर कुछ क्षेत्रों में दुर्घटना के बाद तुरंत प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता। नियमानुसार एंबुलेंस पर ड्राइवर के साथ एक प्रशिक्षित ईएमटी का होना अनिवार्य है, जिले में ईएमटी के 13 पद रिक्त पड़े हैं। विभाग के पास वर्तमान में केवल 29 ईएमटी हैं।
जिन एंबुलेंस पर ईएमटी नहीं हैं, वहां दुर्घटना होने पर अकेले चालक को ही सभी आपात कार्य संभालने पड़ते हैं जिससे मरीजों को शुरुआती उपचार में देरी होती है। प्रशासन ने हाईवे सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर 15 किलोमीटर के दायरे में एंबुलेंस तैनात कर रखी हैं जिससे हादसा होते ही 20 से 25 मिनट के भीतर मौके पर सहायता पहुंच जाती है। वर्तमान में जिले में कुल 25 एंबुलेंस सेवाएं सक्रिय हैं। इसके अलावा कई सामाजिक संस्थाओं की एंबुलेंस भी जरूरत पड़ने पर मौके पर पहुंचकर लोगों की मदद करती हैं।
ईएमटी से घटना स्थल पर ही मिल जाता है 70 फीसदी उपचार : एंबुलेंस में ईएमटी की मौजूदगी से हादसे के वक्त मरीज को 70 फीसदी उपचार एंबुलेंस में ही मिल जाता है। मरीज की जान आसानी से बच जाती है। ऐसा कई मामलों में देखने में भी आया है। ईएमटी की मौजूदगी में एंबुलेंस में कुछ समय पहले चार से पांच महिलाओं की डिलीवरी एंबुलेंस में ही सुरक्षित हो चुकी है। वहीं कई हादसों में घायल लोगों की जान ईएमटी की सुझबूझ से बची है।
कुरुक्षेत्र। नेशनल हाईवे पर पिपली में खड़ी एंबुलेंस। संवाद