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बच्चों को अच्छी शिक्षा दें अध्यापक : रामबिलास

Sat, 06 May 2017 12:25 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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पुस्तक का विमोचन - फोटो : अमर उजाला
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शिक्षा मंत्री प्रोफेसर रामबिलास शर्मा ने कहा कि भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने में अध्यापक की अहम भूमिका रहेगी। इसलिए अध्यापक को अपने नैतिक, सामाजिक मूल्यों का निर्वाण करने के लिए बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देेने होंगे। वे शुक्रवार को हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी कालेज आफ एजुकेशन की ओर से टीचर ए रिफलेक्टिव प्रेक्टिशनर फॉर क्वालिटी एजुकेशन विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे।
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इससे पहले शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय सचिव अवनीश भटनागर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा, कुलसचिव डॉ. प्रवीण कुमार शर्मा, डीन एजुकेशन प्रो. आरएस यादव, कालेज की प्राचार्या डॉ. तरूणा ढल ने सेमिनार का उद्घाटन किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री और अन्य मेहमानों ने कालेज की स्मारिका का विमोचन किया और कालेज को 5 लाख रुपये अनुदान राशि देने की घोषणा की है।  
          
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा महत्वपूर्ण विषय है। वर्तमान में बच्चों के हाथ में कुछ भी नहीं रहा, अभिभावक अपने मन की बात बच्चों पर थोपने का काम करते हैं। जिससे बच्चा सही राह पर आगे नहीं बढ़ पा रहा। इस मामले में अध्यापक अपनी अहम भूमिका निभा सकता है। बच्चों के भविष्य के साथ-साथ राष्ट्र के निर्माण का दायित्व भी शिक्षक के कंधों पर है। आज से 30 वर्ष पूर्व अध्यापक को एक मार्गदर्शक और श्रद्धा के साथ देखा जाता था, लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा नहीं है। इसलिए आज अध्यापक को अपने दायित्व और जिम्मेवारी को समझने की जरूरत है। अध्यापन एक प्रोफेशन नहीं समर्पण भाव से काम करने की एक प्रेरणा है।  
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उन्होंने कहा कि अध्यापक को अपने विषय का मास्टर होना चाहिए। आज देश में अलग-अलग देशों के 236 दूतावास केंद्र हैं और इन केंद्रों पर एमबीबीएस, एमबीए आदि विषय की बजाए संस्कृत स्कालर के जरूरत के बोर्ड अंकित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज शारीरिक शिक्षा और संस्कृत विषय पर फिर से विचार करने की जरूरत है। 1000 वर्ष पूर्व जब देश विश्व गुरु था तब संस्कृत का ज्ञान पूरा विश्व ग्रहण करने के लिए भारत में आता था। आज फिर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विश्व गुरु बनाने की यात्रा को प्रारंभ कर दिया गया है। इस यात्रा को सफल बनाने में शिक्षक ही अहम भूमिका निभा सकता है।     
       
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अवनीश भटनागर ने कहा है कि आज शिक्षा में मेकेनिजम की बहुत जरूरत है और शिक्षक को अपने दायित्व को भी समझना होगा। शिक्षक को ज्ञानवर्धन होने के साथ-साथ स्वयं को हमेशा अपटूडेट रखना होगा।  
   
केयू के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय में समय-समय पर चर्चा-परिचर्चाओं का आयोजन किया जाता है, लेकिन आज शिक्षा के विषय पर जो परिचर्चा हुई है उसके सार्थक परिणाम भी सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही व्यक्ति को व्यक्ति बनाया जा सकता है। सामाजिक और वैश्विक दायित्वों का निर्वाह भी शिक्षा के माध्यम से ही संभव हो सकता है, लेकिन वर्तमान दौर में विश्वविद्यालय से प्रमाण पत्र लेकर जाने वाले विद्यार्थी को देखकर सहजता से अहसास किया जा सकता है कि अध्यापन में कुछ कमी है और शिक्षक अपने उद्देश्य को कुछ भूला हुआ नजर आता है।

उन्होंने कहा कि आज शिक्षक को अपने दायित्व को समझने की निहायत जरूरत है क्योंकि राष्ट्र निर्माण का दायित्व केवल मात्र शिक्षक  के कंधो पर ही है। कालेज की प्राचार्या डॉ तरूणा ढल ने कहा कि इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रांतों के उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों के शिक्षाविद व विशिष्ट शिक्षा विशेषज्ञ अपना शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। इस कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। मंच का संचालन कार्यक्रम को-कोर्डिनेटर डॉ. अमीषा सिंह ने किया। इस अवसर पर केयू के रजिस्ट्रार डॉ प्रवीण कुमार सैनी, डीन एजुकेशन प्रो. आरएस यादव, कोर्डिनेटर डॉ बीएस यादव, जिप चैयरमैन गुरदयाल सुनहेड़ी, भाजपा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, पूर्व जिलाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच, डॉ राजविंद्र कौर, डॉ रोहिणी, डॉ. दिगविजय सिंह, मिस रीटा सैनी, कवंलप्रीत कौर, डॉ ममता चावला, रीना यादव, डॉ. अंग्रेज सिंह, पूजा सैनी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
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