कुरुक्षेत्र। इस बार शनि जयंती का पर्व 27 मई को मनाया जाएगा। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाने वाली शनि जयंती पर इस बार विशेष संयोग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सूर्य देव और छाया के पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था। इन्हें न्याय के देवता और कर्मफल दाता के रूप में पूजा जाता है।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक रामराज कौशिक ने कहा कि इस बार शनि जयंती पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जो अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि त्रिपुष्कर योग में किया गया कार्य तीन गुना फल देता है। इसके अलावा इस दिन बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य योग, शुक्र के मीन राशि में उच्च स्थिति में रहने से मालव्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।
शनि देव इस दिन मीन राशि में विराजमान रहेंगे, जो आध्यात्मिक और मानसिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा। इस विशेष संयोग में शनि की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आ रहे विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। शनि देव व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों का फल अवश्य देते हैं। इसलिए इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा, व्रत एवं जप-तप करने से जीवन के संकटों से मुक्ति मिल सकती है।
शनि जयंती पर करें ये विशेष उपाय
पं. रामराज कौशिक ने कहा कि हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष को विशेष स्थान प्राप्त है और मान्यता है कि शनिदेव का वास इसमें होता है। शनि जयंती पर शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे शनि दोष में कमी आती है और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। शनि मंदिर जाकर शनिदेव के दर्शन करना तथा वहां स्थापित शिला पर तेल चढ़ाना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है।