Saraswati Maha Aarti took place in the festival between conch shell and chanting
- फोटो : Kurukshetra
पिहोवा। पांचवें अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का समापन पर एसडीएम सोनू राम आरती में मुख्य यजमान रहे। उन्होंने कहा कि लुप्त हो चुकी सरस्वती नदी को फिर से धरातल पर लाने के लिए सरकार प्रयासरत है। इस पवित्र नदी के किनारे ही संस्कृति का विकास हुआ और वेदों की रचना की गई।
उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को ज्ञान और संस्कार भी इस नदी के तट से दिए गए। इसलिए सरस्वती नदी का बहुत अधिक महत्व है, इस महत्व को जहन में रखकर ही सरकार लगातार अपने अथक प्रयास कर रही है। यह तीर्थ हमारी धरोहर है, जिसके संरक्षण के साथ-साथ प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना चाहिए। ऐसा करने से आने वाली पीढ़ी में संस्कारों का समावेश होगा, जिससे आपसी भाईचारा, प्रेम और शांति का माहौल बनेगा।
उन्होंने बतायाहरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से आदि बद्री से लेकर कैथल तक सरस्वती चैनल पर स्थित तीर्थ स्थलों और गांवों को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। संध्याकालीन महाआरती से पूरी तीर्थ नगरी मंत्रोच्चारण से मंत्रमुग्ध हो गई और इस दौरान शंख की ध्वनि और मंत्रोच्चारण ने पिहोवा सरस्वती तीर्थ को संगीतमय कर दिया। महाआरती के बाद संस्थाओं की ओर से आतिशबाजी की गई। इस अवसर पर नगर पालिका सचिव अंकुश पाराशर, आशीष चक्रपाणी, अक्षय नंदा, रामधारी शर्मा, मनमोहन चक्रपाणी, युधिष्ठिर बहल, रविंद्र सिंह सहित संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।