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यहां जाम लगाने पर होता अल्ट्रासाउंड

Tue, 05 Apr 2016 01:11 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
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राोड जाम - फोटो : amar ujala
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प्रदेश का पहला ऐसा मेडिकल कालेज करनाल में है, जहां अल्ट्रासाउंड कराने के लिए गर्भवती महिलाओं को रजिस्ट्रेशन से पहले ट्रैफिक जाम करना पड़ता है। गर्भवती महिलाएं जब सड़क पर आती हैं तो मेडिकल कालेज प्रबंधन जाग जाता है और आनन फानन में रेडियोलॉजिस्ट का भी इंतजाम हो जाता है। पर जाम लगाने के लिए गर्भवती महिलाओं को जो परेशानी उठानी पड़ती है, उसकी किसी को चिंता नहीं है। ऐसा एक बार नहीं, बल्कि महीने में कई बार करना पड़ता है। पिछले एक माह की बात करें तो अल्ट्रासाउंड कराने के लिए महिलाओं द्वारा तीन बार अस्पताल चौक पर जाम लगाया जा चुका है। 
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यह तस्वीर है मुख्यमंत्री मनोहरलाल के विधानसभा क्षेत्र करनाल शहर की। इन गर्भवती महिलाओं का दर्द न तो सीएम सुन पा रहे हैं और न ही हर बात एक्शन लेने का मू़ड रखने वाले अनिल विज इन महिलाओं का मर्ज समझ पाए हैं। आलम यह है कि अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अल सुबह ही मेडिकल कालेज में महिलाओं की लाइनें लग जाती हैं, और दोपहर को बताया जाता है कि यहां पर कोई डाक्टर नहीं है, इसलिए अल्ट्रसाउंड नहीं होंगे। 
दरअसल, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल से एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट के लंबी छुट्टी पर जाने के कारण गर्भवती महिलाओं के लिए आफत बन गई है। 31 मार्च को कांट्रेक्ट पूरा होने के बाद सोमवार को निजी डॉक्टर ने भी अल्ट्रासाउंड करने से इंकार कर दिया। इससे महिलाओं का सब्र का बांध टूट गया और अस्पताल के सामने गर्भवती महिलाओं ने बच्चों के साथ में साढ़े नौ बजे से दस बजे तक जाम लगाये रखा। लाइन बनाकर महिलाएं सड़क पर बैठी रही। इससे वाहनों की कतारें लग गई और पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। आनन-फानन में मेडिकल कालेज के अधिकारियों ने अल्ट्रासाउंड करवाने आए मरीजों के नंबर लगाए और रोहतक के खानपुर कलां मेडिकल कालेज से एक रेडियोलॉजिस्ट को डेपुटेशन पर बुलाया गया। पहले दिन सोमवार को करीब दस के अल्ट्रासाउंड कराये गये। अधिकारियों का कहना है कि जब तक रेडियोलॉजिस्ट नहीं आते तब तक डेपुटेशन पर आये डॉक्टर से काम लिया जाएगा। 
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ये काहे का सीएम सिटी है
जाम लगाकर विरोध जता रहे खुशबू वासी सेक्टर-6, सीमा वासी राजीवपुरम, सुमन वासी प्रेम कालोनी, राकेश वासी शिव कालोनी ने बताया कि वह गरीब हैं और निजी डॉक्टरों के पास इलाज करवाने में समर्थ नहीं हैं। निजी अस्पतालों में 800 से 900 रुपये का अल्ट्रासाउंड करते हैं। सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण उन्हें धक्के मिल रहे हैं। ये काहे का सीएम सिटी है। इससे पहले ही अच्छा था कम से कम डाक्टर तो थे यहां पर।  
महिलाओं ने कहा कि पहले अस्पताल में ईलाज करवाने के बाद निजी डॉक्टर के सेंटर पर जाकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। निजी डॉक्टर पहले अपने ग्राहकों के अल्ट्रासाउंड करते हैं और सबसे लास्ट में सरकारी अस्पताल से गये मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं। अल्ट्रासाउंड करवाने के चक्कर में दिनभर भूखी प्यासी बैठी रहती हैं। अब निजी डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करने से साफ इंकार कर दिया है। अस्पताल में डॉक्टर नहीं है। ऐसे स्थिति में उन्होंने जाम लगाकर विरोध जताया। 

एक डॉक्टर वापस नहीं आई, एक के पास नहीं मशीन
दरअसल मेडिकल कालेज के पास एक रेडियोलॉजिस्ट है, वह एक माह की छुट्टी पर गई थी, इसके बाद वापस नहीं लौटी है। करीब छह माह से अस्पताल में यह स्थिति बनी हुई है। वहीं, दूसरी ओर ईएसआई अस्पताल में एक रेडियोलॉजिस्ट है, लेकिन वहां पर न तो अल्ट्रासाउंड मशीन है और न ही एक्सरे मशीन। वो डाक्टर वहां पर अपनी ड्यूटी कर रहा है। ऐसे में स्थिति को समझा जा सकता है कि बड़े बड़े दावे करने वाले विभाग के अधिकारियों को यही बात समझ में नहीं आ रही है। वहीं, सूत्रों का यह भी कहना है कि यह सब राजनीतिक पहुंच के कारण हो रहा है। एक डाक्टर छुट्टी से नहीं लौट रही है तो दूसरा डाक्टर ऐसे स्थान पर ड्यूटी दे रहा है, जहां पर एक्सरे मशीन तक नहीं है।  
200 रुपये देते हैं प्रति केस 
सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के न होने के कारण कांट्रेक्ट के मुताबिक निजी डॉक्टर को प्रति केस 200 रुपये दिये जाते हैं। अब 31 मार्च के बाद निजी डॉक्टर के साथ कांट्रेक्ट पूरा हो गया और नये कांट्रेक्ट की मंजूरी नहीं मिली। इसलिए डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करने से मना कर दिया। सूत्रों का कहना है कि डॉक्टरों ने प्रति केस रुपये बढ़ा दिए हैं। इसलिए कांट्रेक्ट मिलने पर देरी लग रही है। 

मेडिकल कालेज में रूटीन में होंगे अल्ट्रासाउंड 
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज में रेडियोलॉजिस्ट लंबी छुट्टी पर है। रोजाना 20 से 22 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ते हैं। जाम लगाने के बाद यह क्लीयर हो गया है कि अब मेडिकल कालेज में रूटीन में अल्ट्रासाउंड होंगे। क्योंकि खानपुर कलां मेडिकल कालेज से एक रेडियोलॉजिस्ट डेपुटेशन पर आया है। इसे मरीजों को काफी राहत मिलेगी। उन्हें अब इलाज कहीं और अल्ट्रासाउंड कहीं और जगह से वे परेशान थे। 

तीन रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत 
सीएम सिटी में अस्पताल और मेडिकल कालेज एक ही बिल्डिंग में चल रहे हैं। ऐसे में मरीजाें की संख्या भी 1400 है। मरीज बढ़ रहे हैं और सुविधाएं कम होती जा रही हैं। इससे मरीज परेशान हैं और जो स्टाफ है उस पर अतिरिक्त बोझ है। मरीजों के हिसाब से कालेज में कम से कम तीन रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत है। यहां पर एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इस परेशानी में आए दिन मरीज जाम लगाते हैं। 

दवाइयों की पर्ची के लिए भी लंबी लाइनें
मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड ही अकेली समस्या नहीं है। डाक्टरों की कमी के अलावा यहां पर दूसरे स्टाफ की भी कमी है। पर्ची बनाने के लिए लंबी लाइनें लग जाती हैं तो दवाइयों के लिए तो कहना ही क्या? दवाइयों के लिए बनी चार खिड़कियों पर कई कई घंटों तक लोगों को इंतजार करना पड़ता है। अब गर्मी शुरू हो गई तो लोगों का पसीने से भी बुरा हाल होने लगा है। 

वर्जन 
खानपुर कलां से रेडियोलॉजिस्ट डेपुटेशन पर आ गया है। रेडियोलॉजिस्ट के न होने के कारण प्रति केस के हिसाब से निजी डॉक्टर से अल्ट्रासाउंड करवाते थे। कांट्रेक्ट पूरा होने पर अब डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करने से मना किया है। जो व्यवस्था है उसके मुताबिक मरीजों को बेहतर इलाज दे रहे हैं। मरीजों ने विरोध जताया है। उनकी समस्या का हल कर दिया है। 
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-डॉ. योगेश शर्मा, पीएमओ, मेडिकल कॉलेज, करनाल।
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