कुरुक्षेत्र। गीता पर शोध को नई पहचान देने और इसके मर्म से युवाओं को जोड़ने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने बड़ी पहल की है। इसके तहत विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी के आयोजन की तैयारी की जा रही है, जो 17 से 19 दिसंबर तक होगी। इसमें देश-विदेश से शोधार्थी गीता पर शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। संगोष्ठी के दौरान अलग-अलग सत्रों में बेस्ट पेपर का चयन किया जाएगा। साथ ही शोधार्थियों को बेस्ट पेपर अवाॅर्ड दिया जाएगा।
धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में सात दिसंबर से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आगाज हो चुका है। इसमें होने वाले मुख्य आयोजनों का शुभारंभ 17 दिसंबर को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ करेंगे। इसी दिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भी शुभारंभ होगा, जिसमें मुख्य अतिथि रूप में उपराष्ट्रपति शिरकत करेंगे। विवि की ओर से इस संगोष्ठी का थीम वसुधैव कुटुंबकम श्रीमद्भगवद गीता और वैश्विक एकता रखा गया है। इसके माध्यम से विश्व को एक सूत्र में पिरोने का संदेश दिया जाएगा। गीता की राह पर चलने के लिए देश-विदेश के विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे और युवाओं को प्रेरित करेंगे। साथ ही शोधार्थियों की ओर से गीता पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
गीता के संदेश से युवाओं को जोड़ने के लिए संगोष्ठी के दौरान कार्यशाला का भी आयोजन होगा, जिसमें व्यावहारिक शिक्षा के माध्यम से गीता के ज्ञान को आत्मसात करने के गुर सिखाए जाएंगे। इसमें युवाओं को कर्मयोग यानि कामना रहित कर्म करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यही नहीं युवाओं को खेल-खेल में गीता का संदेश दिया जाएगा, जिसका उद्देश्य युवाओं को गीता संदेश आत्मसात करने और कार्यों के लिए उत्साहित करना है।
शोधार्थियों को सम्मानित करने से बढ़ती है कार्य क्षमता, युवा भी होते हैं प्रेरित : कुलपति
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शोधार्थियों को सम्मानित करने से कार्य करने की क्षमता बढ़ती है और अच्छा कार्य करने के लिए युवा उत्साहित होते हैं। उनका कहना है कि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को गीता के मर्म से अवगत करवाने के लिए व्यावहारिक शिक्षा को अपनाया गया है ताकि युवा ज्यादा रुचि लेकर गीता के इस ज्ञान को आत्मसात करें और अपने जीवन में उतारें। इसके तहत पहली बार गीता पर बेस्ट शोध पेपर अवाॅर्ड भी दिए जाएंगे।