जाट आरक्षण को लेकर अकसर सुर्खियों में रहने वाले सांसद राजकुमार सैनी ने इस बार सीधे राज्य सभा की प्रासंगिकता पर ही सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने राज्यसभा के अस्तित्व पर अंगूली उठाते हुए कहा कि देश में दूसरे सदन की कोई जरुरत नहीं है।
लोकसभा में सांसद देश के विकास के लिए बिल बनाते हैं और उसे पास करते हैं, लेकिन राज्यसभा में जाकर उन बिलों को रोक दिया जाता है। यह देश के विकास में बाधक है।
सांसद सैनी ने मंगलवार को जिला सचिवालय में आयोजित एक बैठक के दौरान पत्रकार वार्ता में कहा कि राज्यसभा सदस्यों की जनता के प्रति जवाबदेही नहीं है। वे सिर्फ पार्टी का हुक्म बजाते हैं और अपने आका को खुश करने के लिए राष्ट्रहित को दांव पर लगा देते हैं।
भूमि अधिग्रहण बिल और जीएसटी के लटकने में राज्यसभा को सबसे बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि यह मामला नया नहीं है जब किसी काम को रोका गया है। यह समस्या देश की आजादी के बाद से ही आ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी किसी पार्टी के सदस्य जीतकर सदन में जाते हैं तो पुरानी पार्टी के सदस्य इस सदन में ज्यादा हो जाते हैं। इसके कारण नई पार्टी के सभी बिल रोक दिए जाते हैं।सांसद ने कहा कि राष्ट्र की तरक्की व विकास में राज्यसभा बाधा है और इसे समाप्त करना चाहिए। यह बहस का विषय है, इसके लिए खुली बहस होनी चाहिए।
सांसद ने कहा कि चीन और दुबई समेत कई देशों में सिंगल विंडो सिस्टम है और वे ज्यादा जल्दी तरक्की कर गए। क्योंकि वहां राज्यसभा नहीं है। सैनी ने कहा कि नेताओं व दलों ने स्वार्थ साधने के लिए राज्यसभा के नाम पर देश को रोकने का इंतजाम कर रखा है।
सांसद को सोच समझकर करनी चाहिए बयानबाजी : अरोड़ा
इनेलो प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने सांसद राजकुमार सैनी के ब्यान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के संविधान निर्माता डॉ. भीम राव अंबेडकर द्वारा यह सदन बनाया गया था कि कोई भी जीती हुई पार्टी मनमानी न कर सके। यह तो उनका भी अपमान है।
इसके अलावा मौजूदा पार्टी के भी कई राज्यसभा सांसद केन्द्र में मंत्री हैं। यह उनका भी अपमान है इसलिए सांसद को अपने बयान सोच समझकर देने चाहिए।
राज्यसभा का अपना महत्व
पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. रामप्रकाश ने कहा कि राज्यसभा का अपना एक महत्व है। कोई भी सदस्य किसी काम को नहीं रोकता केवल इस सदन में समीक्षा की जाती है, लेकिन विपक्ष के सदस्य जरूर उसमें देरी करते है जो नहीं होना चाहिए।
उन्होनें यह भी बताया कि जो सदस्य चुनाव नहीं लड़ना चाहते उनकी गुणवत्ता का इस सदन के द्वारा लाभ लिया जाता है। परंतु किसी भी बिल को रोका नहीं जाना चाहिए।