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39 करोड़ खर्चने के बाद भी नहीं सुधरे हालात, जिला अस्पताल की नई ईमारत में बने 21 प्राईवेट वार्डों में शिफ्ट की ओपीडी

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लंबे इंतजार के बाद 39 करोड़ की लागत से तैयार हुई एलएनजेपी अस्पताल की वातानुकूलित इमारत भी मरीजों को दी जा रही चिकित्सा सुविधा में सुधार न ला सकी। हालात इस कदर खराब हैं कि नई इमारत में बेड की कमी के चलते एक बेड पर दो से तीन मरीज हैं। वहीं, अस्पताल की चौथी मंजिल पर बने करीब 21 प्राइवेट वार्डों में ओपीडी सहित अन्य कार्यालय शिफ्ट कर दिए हैं, जिसकी वजह मरीजों को ही नहीं परेशानी हो रही, बल्कि रोजाना सरकार को पांच हजार से अधिक का घाटा हो रहा है। हालांकि चिकित्सा अधीक्षक द्वारा शीघ्र ही व्यवस्था बनाए जाने का दावा किया गया है।
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कोविड-19 महामारी के बीच यह अडजेस्टमेंट कब किस के लिए जानलेवा साबित भी हो सकती है, यह किसी को मालूम नहीं। अस्पताल की नई चार मंजिला इमारत में पांच लिफ्ट, सेंट्रल एसी, वाटर गीजर, आपातकालीन सेवाएं, गायनी, ऑपरेशन थियेटर, एक्सरे एवं ऑर्थो, सर्जिकल, पुरुष और महिला वार्ड के अलावा अस्पताल के चौथे मंजिल पर करीब 22 प्राइवेट वार्ड बनाए हैं, ताकि कोई भी मरीज अपनी सुविधा अनुसार प्राईवेट वार्ड ले सके, लेकिन इन वार्डों पर चिकित्सकों और अकाउंटेंट विभाग ने कब्जा किया हुआ है। वार्ड के नेम प्लेट उतार डॉक्टरों एवं अकाउंटेंट विभाग के अधिकारियों ने अपनी-अपनी नेम प्लेट लगा ली हैं।
सरकारी अस्पताल में प्राइवेट वार्ड से ही होती है इनकम
एलएनजेपी अस्पताल में मरीजों को सरकार द्वारा हर प्रकार की सुविधा नि:शुल्क प्रदान की जाती है। बड़े ऑप्रेशन से लेकर महंगी दवाइयां और टेस्ट भी बिल्कुल फ्री होते हैं, लेकिन अगर कोई मरीज अस्पताल में प्राइवेट वार्ड लेता था तो उससे प्रतिदिन के हिसाब से 250 वसूल किये जाते थे, जिससे अस्पताल की इनकम भी होती है, लेकिन प्राइवेट वार्ड पर कब्जे होने से अब यह भी बंद हो गया।
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100 बेड की नई इमारत से भी राहत की थी उम्मीद
100 बेड का नया अस्पताल से मरीजों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अभी भी हालात ज्यों की त्यों हैं। इस समय वर्ष 1976 में निर्मित 50 बेड की क्षमता के अस्पताल को मरीजों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसे बढ़ाकर 100 बेड का अस्पताल किया गया था। गत 43 वर्षों से अब एलएनजेपी अस्पताल की ओपीडी करीब 10 गुणा बढ़ चुकी है, जिसके कारण मरीजों को दाखिल करने में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मरीजों की परेशानी को देखते हुए बनाई जा रही है व्यवस्था : डॉ. शैली
एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, हृदय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने से पहले ही नेत्र रोग विभाग, हड्डी रोग विभाग एवं सर्जरी विभाग सहित अन्य कार्यालयों को प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया गया था, लेकिन मरीजों की परेशानी को देखते हुए वे व्यवस्था कर रहे हैं, ताकि सुचारू रूप से ओपीडी भी चलती रहे और मरीजों को भी परेशानी न हो।
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