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Kurukshetra News: तूल पकड़ रहा धान घोटाला, अब दोबारा से शुरू हुए भौतिक सत्यापन पर उठे सवाल

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पिहोवा। किसान यूनियन की ओर से दिए गए ज्ञापन के बाद फिर से शुरू हुए राइस मिलों के भौतिक सत्यापन विवादों में घिरता नजर आ रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे मिलीभगत का खेल करार दिया है। भाकियू के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने आरोप लगाया कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और कई महत्वपूर्ण नियमों की अनदेखी की गई।
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किसान यूनियन के प्रवक्ता ने विशेष रूप से एक राइस मिल का जिक्र करते हुए कहा कि इस मिल का पिछले महीने का बिजली बिल मात्र 316 यूनिट दर्शाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी कम बिजली खपत के साथ कोई राइस मिल कैसे संचालित हो सकती है। उनका कहना था कि यह खपत तो एक सामान्य घर से भी कम है, ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि इस मिल में उत्पादन हुआ होगा। उन्होंने कहा कि जब मशीनें चली ही नहीं तो फिर भौतिक सत्यापन में क्लीन चीट कैसे दे दी गई। क्या कोई औद्योगिक इकाई 316 यूनिट बिजली में लाखों रुपये का धान प्रोसेस कर सकती है।
भारतीय किसान यूनियन ने इस विषय को पूरे मामले का सबसे बड़ा सबूत बताते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। प्रवक्ता ने बताया कि भौतिक सत्यापन के लिए निर्धारित नियमों का पालन भी नहीं किया गया। सामान्य प्रक्रिया के तहत किसी भी राइस मिल की जांच से पहले विभागीय अधिकारियों की ओर से मौके की वीडियोग्राफी करवाई जाती है। इसके बाद फिजिकल वेरिफिकेशन टीम मौके पर पहुंचकर स्टॉक, मशीनरी और उत्पादन की स्थिति का मिलान करती है। लेकिन इस मामले में न तो पहले वीडियोग्राफी करवाई गई और न ही जांच के दौरान पारदर्शिता दिखाई दी।
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उन्होंने आरोप लगाया कि यहां पर केवल खानापूर्ति की गई और रिपोर्ट को सही कर दिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं मिलीभगत का खेल चल रहा है। राइस मिलों के भौतिक सत्यापन के लिए सरकार और खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। इनका पालन अनिवार्य होता है। निरीक्षण से पहले संबंधित मिल का रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और डिलीवरी डेटा विभाग की ओर से जांचा जाता है।
जांच से पहले और दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और बाद में किसी विवाद की स्थिति में प्रमाण उपलब्ध करवाए जा सके। टीम मिल में मौजूद धान, चावल और अन्य स्टॉक का भौतिक मिलान करती है। मशीनों की स्थिति, उत्पादन क्षमता और वास्तविक संचालन का भी आकलन किया जाता है। मिल की बिजली खपत और उत्पादन के आंकड़ों का आपस में मिलान किया जाता है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि उत्पादन वास्तविक है या कागजी। उन्होंने आरोप लगाया कि है कि इन सभी नियमों को दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने मांग की है कि संबंधित विभाग को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए।
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