कुरुक्षेत्र। खाप महापंचायत में दोपहर के समय पेड़ के नीचे आराम करते विभिन्न खापों से जुड़े प्रत
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला में सर्वखाप महापंचायत व चिंतन शिविर आयोजित हुआ। इसमें हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के 200 से अधिक खापों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इन खापों ने नशे के बढ़ते खतरे को समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया।
उन्होंने इस गंभीर समस्या के खिलाफ सीधे मोर्चा संभालने का महत्वपूर्ण फैसला किया है। शिविर के दूसरे दिन चार अलग-अलग सत्रों में करीब दस प्रमुख मुद्दों पर गहन मंथन किया गया। खाप प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से एक निष्कर्ष पर सहमति जताई। उनका मानना था कि केवल सरकारी कार्रवाई से नशे पर पूरी तरह अंकुश लगाना संभव नहीं है। इसके लिए समाज को भी अपनी जिम्मेदारी सक्रिय रूप से उठानी होगी।
खाप नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जवानी बचेगी तो समाज बचेगा और इसी सोच के साथ अब खापें नशे के खिलाफ गांव-गांव जनजागरण अभियान चलाकर इसे सामाजिक आंदोलन का रूप देंगी। इससे न केवल युवाओं को नशे से दूर रखने का प्रयास होगा, बल्कि ग्रामीण समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की नई भावना भी विकसित होगी।
चिंतन शिविर के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए चरखी दादरी के पूर्व विधायक व सांगवान 44 खाप के प्रधान सोमवीर सांगवान, जाट धर्मशाला के प्रधान डॉ. कृष्ण श्योकंद व देशवाल खाप के प्रधान संजय देशवाल ने कहा कि नशा अब शहरों से निकलकर गांवों तक पहुंच चुका है और इसकी सबसे बड़ी मार युवाओं पर पड़ रही है, ऐसे में खाप पंचायतें गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने का काम करेंगी। प्रतिनिधियों ने माना कि यदि युवा पीढ़ी सुरक्षित रही तो समाज और संस्कृति दोनों सुरक्षित रहेंगे। खाप प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ यह मुहिम किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है, इसके लिए शासन, प्रशासन, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।