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Kurukshetra News: कैथल रोड पर लगी 100 स्ट्रीट लाइटों में से 50 खराब

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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी की रीढ़ कहे जाने वाले कैथल रोड पर विश्वकर्मा चौक से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के थर्ड गेट तक की सड़क शाम होते ही अंधेरे में डूब जाती है। इस मार्ग पर लगभग 100 स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, जिनमें से 50 से अधिक खराब हैं। केशव पार्क की बाउंड्री पर छठी पातशाही गुरुद्वारे से नीलकंठ रेस्ट हाउस तक 30 अतिरिक्त लाइटों के बावजूद, आधा रास्ता अंधेरे में रहता है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है।
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रात के समय यहां अंधेरा रहने से राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के मौसम में केशव पार्क में टहलने आने वाले लोगों को भी पानी भरे गड्ढों के साथ-साथ अंधेरे का सामना करना पड़ता है। इससे असामाजिक तत्वों को मौका मिलता है, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंता और बढ़ जाती हैं। बुधवार रात की पड़ताल में स्थिति की गंभीरता सामने आई। विश्वकर्मा चौक से देवीलाल चौक तक 19 स्ट्रीट लाइटों के खंभे हैं जिनमें से 10 से अधिक की लाइटें बंद पाई गईं, जिसके चलते देवीलाल चौक पूरी तरह अंधेरे में डूबा था। शहर के सबसे बड़े चौक की यह स्थिति चिंताजनक है। गुरुद्वारा चौक की हाई-मास्ट लाइट भी खराब मिली, जहां दुकानदारों और गुरुद्वारे की निजी व्यवस्था से ही थोड़ी-बहुत रोशनी उपलब्ध है।
देवीलाल चौक से लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल तक लगभग 49 स्ट्रीट लाइटें हैं, जिनमें से 12 पूरी तरह खराब थीं और 10 लाइटों में केवल एक तरफ का बल्ब जल रहा था। अस्पताल के गेट तक भी अंधेरा छाया रहा। वहीं अस्पताल से थर्ड गेट तक 32 लाइटों में से आठ पूरी तरह बंद थीं और पांच आंशिक रूप से खराब मिलीं। अंधेरे के कारण कैथल रोड पर हादसों का खतरा बढ़ गया है। बारिश में गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। उधर, नगर परिषद के ईओ राजेश कुमार का कहना है कि खराब स्ट्रीट लाइटों की जांच करवाई जा रही है। जिन्हें जल्द दुरुस्त करवा दिया जाएगा।
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थर्ड गेट पर कभी लाइट जलती नहीं देखी : हिमांशु
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईआईएचएस में बीए फाइनल इयर के छात्र हिमांशु का कहना है कि थर्ड गेट के पास कभी स्ट्रीट लाइट जलती नहीं देखी। केवल कैथल-पिहोवा कैंची पर हाई-मास्ट लाइट काम करती है। वह रात में लाइब्रेरी से चाय पीने आते हैं, लेकिन अंधेरे के कारण असुरक्षित महसूस करते हैं। उनकी मांग है कि नगर प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हादसों का खतरा बना रहता है।



अस्पताल गेट पर अंधेरा, हो चुका है हादसा : हर्षित
अपने पापा का उपचार करवाने आए हर्षित दीक्षित ने बताया कि अंधेरे के कारण कुछ दिन पहले अस्पताल के गेट पर एक बाइक पर मां-बेटे हादसे के शिकार हो गए थे, जिसमें बेटे की मौके पर मौत हो गई और मां की टांग काटनी पड़ी थी। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया और अस्पताल के गेट पर अंधेरा छाया रहता है।
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