सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आए दिन फजीहत झेल रही और लगातार सुर्खियों में रहने वाले प्रदेश के प्रथम विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत अब यूनिवर्सिटी में आर्मी कैंटोनमेंट जैसी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जाएगी। यानी बाहर से अपने वाहनों को लेकर आने वाले लोगों को अपना कोई पहचानपत्र यूनिवर्सिटी गेट पर ही जमा कर भीतर जाना होगा। इसके अलावा यूनिवर्सिटी के सभी विभागों के छात्रों और स्टाफ सदस्यों के अलावा प्राध्यापकों को स्टीकर जारी किए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को स्टीकर भेज दिए हैं। जिस छात्र अथवा स्टाफ को स्टीकर जारी किया जाएगा उसका रिकॉर्ड भी यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन मेंटेन किया जाएगा। बता दें कि अमर उजाला द्वारा लगातार केयू की सुरक्षा व्यवस्था में खामियों को प्रकाशित कर केयू प्रशासन का इस ओर ध्यान दिलाया है।
प्रदेश की पहली यूनिवर्सिटी में विभिन्न विभागों और कॉलेजों में करीब 12 हजार छात्र-छात्राएं हैं और इनमें से 6500 के आसपास हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा 5 हजार के आसपास प्राध्यापक और अन्य स्टाफ भी यूनिवर्सिटी में कार्यरत हैं। इन सभी के अलावा करीब 20 हजार छात्र दूरवर्ती शिक्षा के माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लेकिन, सुरक्षा की जिम्मेदारी महज कुछ कर्मचारियों पर ही है। हाल ही में सुरक्षा व्यवस्था में चूक के चलते दो गुटों में बवाल हो गया था, जिनमें आउट साइडरों की बड़ी भूमिका सामने आई थी। इसके अलावा अभी हाल ही में सुरक्षा व्यवस्था की खामियां उस समय खुल कर सामने आई थीं, जब जिला पुलिस के डीएसपी रमेश गुलिया समेत भारी संख्या में पुलिस बल ने हॉस्टलों की चेकिंग की तो वहां 35 से ज्यादा आउट साइडर कमरों में मिले। हालांकि, केयू ने फौरी तौर पर कमरों का रजिस्ट्रेशन रद कर दिया, लेकिन साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने के लिए भी योजना बनाई है।
यह योजना की है तैयार
यूनिवर्सिटी में सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत करने के लिए केयू प्रशासन ने निर्णय लिया है कि यूनिवर्सिटी में लोगों का आवागमन अधिक है। इसी के चलते सभी कर्मचारियों, अधिकारियों और छात्र-छात्राओं के वाहनों पर यूनिवर्सिटी का स्टीकर लगाए जाने का फैसला लिया गया है। इसके बाद स्टीकर लगे वाहनों को भीतर आराम से जाने दिया जाएगा और जिन वाहनों पर स्टीकर नहीं होगा उन वाहन चालकों को अपना पहचान पत्र चाहे लाइसेंस अथवा गाड़ी की आरसी गेट पर जमाकर भीतर आने की अनुमति प्रदान की जाएगी। इससे, ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों के लिए बाहरी वाहनों की पहचान करना आसान हो जाएगा।
वर्जन
"केयू में लोगों का आवागमन काफी ज्यादा है। ऐसे में प्रत्येक वाहन की जांच नहीं की जा सकती है। इसलिए स्टीकर लगाने की योजना बनाई है। सभी विभागों में स्टीकर भेज दिए गए हैं। जिन वाहनों में स्टीकर नहीं होगा उन्हें गेट पर ही अपना पहचान-पत्र जमा करवाकर आना होगा। वापसी पर उसे वह पहचान-पत्र मिल जाएगा। इस योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है।"
प्रो. अनिल गुप्ता, मुख्य सुरक्षा अधिकारी, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र।