संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। 11 जनवरी 1957 को संस्कृत के एक विभाग के साथ शुरू हुआ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय अब 49 विभागों में यूजी, पीजी और डिप्लोमा सहित 171 कोर्स करा रहा है। यही नहीं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध, खेल और सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। खास बात यह है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र रहे प्रो. सोमनाथ सचदेवा 38 वें कुलपति और डॉ. संजीव शर्मा कुलसचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि इनके अलावा विश्वविद्यालय के कई शिक्षक प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के पद पर आसीन हैं।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थापना दिवस पर मंगलवार को विवि के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा क्रश हॉल (विश्वविद्यालय सभागार) में सुबह 10 बजे हवन आयोजित किया जाएगा। बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस खास अवसर पर शिक्षकों को रिसर्च के लिए अवार्ड घोषित करने सहित कई घोषणाएं करेगा। इससे न केवल रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि शोधकर्ताओं को भी विश्वविद्यालय अवार्ड के साथ सम्मानित करेगा। बता दें कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। डॉ. एसी जोशी विश्वविद्यालय के पहले कुलपति बने, जिन्होंने 1959 तक कुलपति की जिम्मेदारी संभाली।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा का कहना है कि विश्वविद्यालय शिक्षा ही नहीं, संस्कृति और खेलों को भी बढ़ावा दे रहा है। विश्वविद्यालय ने खेल क्षेत्र में 12 अर्जुन अवार्ड, 5 द्रोणाचार्य अवार्ड और एक ध्यानचंद अवार्ड देश को दिया है।
डिस्टेंस से ऑनलाइन बीए, मास कॉम और एमकॉम पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला पहला विश्वविद्यालय बना है। इतना ही नहीं, जापानी कोर्स सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में नए कोर्स शुरू किए गए हैं। विश्वविद्यालय डिस्टेंस से ऑनलाइन बीए, मास कॉम और एमकॉम पाठ्यक्रम भी शुरू करने जा रहा है।
केयू वीसी प्रो. सोमनाथ सचदेवा। - फोटो : Kurukshetra
केयू कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा।- फोटो : Kurukshetra