कुरुक्षेत्र। जिले में पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने संबंधी एनजीटी के आदेशों पर अमल नहीं हो रहा है। प्रतिबंध के बावजूद पॉलिथीन का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। अधिकारी भी इस पर आंख मूंदे बैठे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि नगर परिषद द्वारा लंबे समय से पॉलीथिन अंकुश लगाने के लिए एक बार भी कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों की इस लापरवाही के चलते दुकानदारों के हौसले बुदंल हैं और सरेआम पॉलीथिन का इस्तेमाल जारी है। यह स्थिति तब है जबकि छह माह पहले नगर पालिका ने इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए कई दावे किए थे, पॉलीथिन को लेकर शहर में प्रवेश करने वाली गाड़ियों को रोकने के लिए योजना भी बनाई थी।
कुरुक्षेत्र शहर में सेक्टर-17, पुराने बस अड्डे के पास, गीता कॉलोनी, कीर्ति नगर, गांधी नगर, झांसा रोड, मोहन नगर, सेक्टर सात और दस का डिवाइडिंग रोड, नरकातारी रोड, सलारपुर रोड, लघु सचिवालय के पास, सेक्टर-13 सहित अन्य स्थानों पर पॉलीथिन का अंबार लगा है। इसके अलावा कस्बों के गांवों में भी पॉलीथिन खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं कई बार तो कूड़ा - करकट सहित पालीथिन के ढेरों में अंबार में आग लगा दी जाती है। इससे निकलने वाली जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस पर्यावरण को प्रदूषित करती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इतना ही नहीं यह पॉलीथीन बेसहारा गोवंश के लिए भी घातक साबित हो रही है। खाने की तलाश के लिए गंदगी में मुंह मारते गोवंश इसको निवाला समझ निगल रहे हैं। इससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है।
योजना पर नहीं हुआ कोई काम
जिला नगर आयुक्त की ओर से करीब छह माह पहले ही नप कार्यालय में पॉलीथिन के थोक विक्रेताओं की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक लगाने के लिए बड़े बड़े दावे किए गए थे। बकायदा इसका इस्तेमाल न करने के संबंध में लोगों को शपथ भी दिलाई गई थी। इतना ही नहीं एक कमेटी का गठन कर पॉलीथिन लेकर शहर में प्रवेश करने वाली गाड़ियों को भी पकड़ने की योजना बनाई गई। बैठक के बाद आज तक इस पर कोई काम नहीं हुआ।
रोजाना जनरेट होने वाले कूड़े में 80 प्रतिशत पॉलीथिन
बता दें कि नगर परिषद के क्षेत्र में आने वाली 60 हजार इकाइयों से रोजाना करीब 70 टन कूड़ा जनरेट होता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा पॉलीथिन होता है। बाकी का कूड़ा तो डिस्पोज हो सकता है, लेकिन पॉलीथिन पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या है।
पॉलीथिन का इस्तेमाल पूरी तरह से हो बंद: प्रतीक
शहरवासी प्रतीक गाबा पर्यावरण का कहना है कि प्रदूषण से बचाने के लिए पॉलीथिन का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद होना चाहिए। इसके स्थान पर कपड़े के थैले और जैविक रूप से नष्ट होने वाले बैग उपयोग में लाए जा सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि यहां प्रदूषण मुक्त शहर बनाने के लिए कचरा प्रबंधन सिस्टम शुरू किया जाए।
जहां बनते हैं, वहीं कार्रवाई क्यों नहीं करती सरकार: सुरेंद्र
सुरेंद्र का कहना है कि पॉलीथिन प्रयोग पर प्रतिबंध, लेकिन ऐसा कहीं नजर तो आता नहीं। प्रशासन द्वारा शहर और गांव में दुकानदारों को कभी-कभार चेतावनी भी दी जाती है। बड़ी बात यह है कि जिन फैक्ट्रियों में इसका निर्माण होता है, उन पर आखिर क्यों कार्रवाई हो पाती? पाबंदी के बावजूद पॉलीथिन रास्ते में ही जब्त क्यों नहीं हो पाता? यह अहम सवाल हैं।
ये कहता है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अनुसार पंजाब एवं हरियाणा में किसी भी क्षेत्र में पॉलीथिन सहित प्लास्टिक के कैरी बैग के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। साथ ही ये भी स्पष्ट किया गया है कि इसका प्रयोग करने वाले पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। इसके बावजूद पॉलीथिन व प्लास्टिक सामान का धड़ल्ले से प्रयोग करके एनजीटी के आदेशों का सरेआम मजाक उड़ाया जा रहा है और नप द्वारा कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही।
गठित की गई टीम, होगी कार्रवाई: ईओ बलबीर
नप के कार्यकारी अधिकारी बलबीर रोहिल्ला ने बताया कि पॉलीथिन के प्रयोग पर रोकथाम के लिए टीम का गठन किया गया है। अब अगले सप्ताह से पॉलीथिन के प्रयोग करने पर चालान किए जाएंगे। इसके लिए नप ने कमर कस ली है।