कुरुक्षेत्र। हमें जिंदा रहने के लिए अपनी जमीन बचानी है तो प्राकृतिक खेती को अपनाना ही होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने यह जानते हुए सार्थक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। यहां तक कि केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाएगी। इसे गति देने के लिए केंद्रीय स्तर पर समिति का भी गठन किया जाएगा।
यह ऐलान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। वे शनिवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राकृतिक खेती माॅडल को देखने के लिए फार्म पर पहुंचे थे।उन्होंने गेहूं से लेकर गन्ना, लहसुन और बागवानी की फसलों का बारीकी से अवलोकन किया तो गन्ने के रस व कच्चे मटर का स्वाद भी चखा। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ़ हरिओम ने कृषि मंत्री को हर फसल को दिखाया तो उन्हें तैयार करने के तरीके से लेकर उत्पादन व बाजार में मांग की भी जानकारी दी। राज्यपाल ने उन्हें खेत से ही उखाड़कर ब्रोकली पौधा भी भेंट किया तो वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ऐसा स्वाद व ऐसी फसल उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।
पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि आज हमारी जमीन बंजर होने की राह पर है तो केमिकल युक्त खेती के चलते बीमारियों से हर कोई जकड़ा हुआ है। केमिकल युक्त खेती करने से ऐसे हालात बन चुके हैं कि हमारे लिए रहने की जमीन भी नहीं बचेगी। ऐसे में प्राकृतिक खेती को अपनाया जाना बेहद जरूरी है। सरकार इसके लिए प्रशिक्षण और परीक्षण केंद्र खोल रही है। उन्होंने कहा कि आचार्य देवव्रत प्राकृतिक खेती के जनक ही नहीं बल्कि ऋषि हैं, जो पूरी मानवता और धरा को बचाए रखने के लिए इतना बड़ा अभियान चलाए हुए हैं।
कम उत्पादन की धारणा गलत, हर किसान करें खेती
कृषि मंत्री ने कहा कि यह धारणा भी गलत है की प्रकृति खेती में उत्पादन कम होता है। सही तकनीक से प्राकृतिक खेती की जाए तो भरपूर उत्पादन मिल सकता है। आज जरूरत है हर किसान इस खेती को अपनाए। कम से कम पहले एक-दो एकड़ से ही शुरू करें। अब तक जिन भी किसानों ने यह खेती अपनाई है, सभी ने इसे फायदे का ही सौदा बताया है।
किसानों की मांगों को लेकर सरकार गंभीर
कृषि मंत्री ने आंदोलनरत किसानों के मामले को लेकर कहा कि सरकार उनकी मांग को लेकर गंभीर है। लगातार चर्चा भी चल रही है। रास्ता रोकना भी किसी भी स्तर पर सही नहीं है। मोदी सरकार शुरू से ही किसान हितैषी रही है।
प्राकृतिक खेत की मिट्टी को देख हुए गदगद
केंद्रीय कृषि मंत्री ने 180 एकड़ के फार्म पर पहुंचते ही प्राकृतिक खेत की मिट्टी को उठाकर देखा और गदगद हो उठे। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक तकनीक का ही कमाल है कि इतनी नरम मिट्टी है, जिसमें कोई भी फसल की जा सकती है। उन्होंने बताया कि केंचुए ही मिट्टी को नरम बना सकते हैं। कृषि मंत्री के कोल्हू पर खुद गन्ने की पिराई की तो रस का स्वाद भी चखा। उनके साथ कृषि अनुसंधान परिषद के अधिकारी भी मौजूद रहे।