संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। केयू डीन एकेडमिक अफेयर्स और एनईपी के समन्वयक की ओर से सीनेट हॉल में करिकुलम और क्रेडिट फ्रेमवर्क आधारित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यूजी कार्यक्रमों के लिए संशोधित ढांचे पर पाठ्यक्रम बनाने हेतु विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्षों, निदेशकों, प्रधानाचार्यों और परीक्षा नियंत्रकों की बैठक आयोजित की गई। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि केयू कैंपस में एनईपी-2020 को पहले ही लागू कर चुका है और संबंधित कॉलेजों में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति करिकुलम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति आधारित क्रेडिट फ्रेमवर्क को सत्र 2023-24 से लागू किया जाएगा।
बैठक में एनईपी के समन्वयक प्रो. अनिल वशिष्ठ ने विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति करिकुलम और क्रेडिट फ्रेमवर्क आधारित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत स्वरूप के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करिकुलम और क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुसार स्नातक के छात्रों को मल्टीडिसीप्लिनरी डिग्री प्रोग्राम और मेजर डिग्री प्रोग्राम के तहत कोर्सिज चुनने का अवसर मिलेगा। यूजी मल्टीडिसीप्लिनरी प्रोग्राम में छात्र को तीन वर्ष में 132 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। यूजी मेजर डिग्री प्रोग्राम में तीन वर्ष में 136 व चार वर्ष में 184 क्रेडिट अर्जित करने होंगे और तीन वर्षीय सिंगल मेजर-माईनर स्कीम में भी छात्र को तीन वर्ष में 136 व चार वर्ष में 184 क्रेडिट अर्जित करने होंगे।
छात्र एक और दो वर्ष के अंतराल पर डिग्री प्रोग्राम से एग्जिट भी कर सकेंगे। एक वर्ष पर यूजी सर्टिफिकेट कोर्स, दो वर्ष पर यूजी डिप्लोमा कोर्स, तीन वर्ष पर यूजी डिग्री कोर्स और चार वर्ष पर यूजी ऑनर्स व ऑनर्स विद रिसर्च का प्रावधान किया गया है। प्रो. वशिष्ठ ने बताया कि यूजी मल्टीडिसीप्लिनरी प्रोग्राम में छात्र को प्रथम वर्ष में ऑफर किए विषयों में तीन विषय चुनने होंगे। इसके अलावा छात्र द्वितीय वर्ष में मल्टीडिसीप्लिनरी यूजी प्रोग्राम स्कीम व वन मेजर और माईनर यूजी प्रोग्राम स्कीम को भी चुन सकते हैं।
चार क्रेडिट थ्योरी कोर्सिज में तीन क्रेडिट लेक्चर और एक क्रेडिट टयूटोरियल का होगा व इसी तरह चार क्रेडिट के प्रैक्टिकल कोर्स में तीन क्रेडिट थ्योरी व एक क्रेडिट प्रैक्टिकल का होगा। उन्होंने बताया कि तीन वर्षीय यूजी डिग्री प्रोग्राम को पूरा करने के बाद छात्रों को सीजीपीए 7.5 और ज्यादा लाने पर यूजी ऑनर्स व आनर्स विद रिसर्च का अवसर भी प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा यूजी डिग्री विद रिसर्च में छात्रों को 12 क्रेडिट के शोध कार्य को भी करना होगा। प्रो. वशिष्ठ ने बताया कि छात्रों का मूल्यांकन 30 प्रतिशत इंटरनल असेसमेंट और 70 प्रतिशत एंड टर्म परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। इस मौके पर प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. संजीव गुप्ता, प्रो. अनिता दुआ, डॉ. सुमन मेंहदिया सहित अन्य मौजूद रहे।