कुरुक्षेत्र। दीप प्रज्ज्वलित करते कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्यातिथि सहित अन्य सदस्य। संवाद
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में शुक्रवार को विश्व होम्योपैथी दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के पूर्व चेयरमैन डॉ. अनिल खुराना और विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के सचिव डॉ. संजय गुप्ता ने शिरकत की। मुख्य अतिथि डॉ. अनिल खुराना ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का जन्म भले ही जर्मनी में हुआ हो, लेकिन इसका वास्तविक विकास और विस्तार भारत में हुआ है। आज भारत में होम्योपैथी की मांग लगातार बढ़ रही है और यह चिकित्सा प्रणाली देशभर में लोकप्रियता हासिल कर रही है। भावी चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे अपनी चिकित्सा पद्धति के प्रति निष्ठा रखें और होम्योपैथी के क्षेत्र में सेवा देने के लिए प्रेरित रहें। विद्यार्थियों को अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने बताया कि भारत में वर्तमान में 280 से अधिक होम्योपैथी कॉलेज, 3.60 लाख से अधिक पंजीकृत होम्योपैथिक डॉक्टर और 400 से अधिक होम्योपैथिक फार्मेसियां कार्यरत हैं। देश की 35 से अधिक होम्योपैथिक कंपनियों की औषधियां विदेशों में निर्यात की जा रही हैं, जिससे भारत इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के सचिव डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि आयोग ने होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं, जिनका प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। होम्योपैथी के सिद्धांत आयुर्वेद से मेल खाते हैं, इसलिए हमें इसकी ताकत को और अधिक बढ़ाने के लिए अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करना होगा। कार्यकारी कुलसचिव विकास शर्मा ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा केंद्र से प्रत्येक दिन 50 से अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं। अब तक छह हजार से अधिक मरीज सफलतापूर्वक उपचार प्राप्त कर चुके हैं। चिकित्सालय में 500 से अधिक औषधियां उपलब्ध हैं, जिससे लोगों को बेहतर सुविधा और उपचार मिल रहा है। इस मौके पर आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
क्रॉस पैथी से बचें : प्रो. धीमान
कार्यक्रम अध्यक्ष कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि चिकित्सा पद्धतियों के बीच क्रॉस पैथी से परहेज जरूरी है। एक कुशल चिकित्सक को केवल शारीरिक रोग नहीं, बल्कि मन की स्थिति को भी समझना चाहिए। चिकित्सा को केवल इलाज नहीं, बल्कि एक समग्र दृष्टिकोण से अपनाना चाहिए।