कुरुक्षेत्र। दयानंद महिला महाविद्यालय में वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में चर्चा-परिचर्चा का आयोजन पंजाबी साहित्य परिषद, युवा कल्याण परिषद एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. उपासना आहुजा ने की।
डॉ. उपासना ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबजादों का बलिदान भारतीय इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है। साहिबजादों ने धर्म, मानवता और सत्य की रक्षा के लिए अद्वितीय साहस का परिचय दिया। विशेष रूप से छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने मात्र नौ और सात वर्ष की अल्पायु में मुगल शासक औरंगजेब के सामने झुकने से इन्कार कर दिया और अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया।
डॉ. आहुजा ने कहा कि लालच, भय और प्रताड़ना के बावजूद दोनों वीर बालकों ने अपने धर्म और स्वाभिमान की रक्षा करते हुए जीवित दीवार में चिनवाया जाना स्वीकार किया। उनका यह सर्वोच्च बलिदान आज भी हमें राष्ट्र, धर्म और मानवीय मूल्यों के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहने की प्रेरणा देता है।