पिहोवा। जापान में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान शांति मार्च निकालते हुए श्रद्वालु। स्वयं
पिहोवा। जापान में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें तीर्थनगरी पिहोवा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेने पहुंचे हैं। गीता जयंती महोत्सव के चौथे दिन भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण तथा भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया। इसके अलावा स्वामी ज्ञानानंद के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भगवद् गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
समाजसेवी अजय कालड़ा ने कहा कि गीता महोत्सव भारत की आध्यात्मिक विरासत को विश्व मंच पर स्थापित करने का सशक्त माध्यम बन रहा है। गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, संपूर्ण मानवता को जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक ग्रंथ है। जापान जैसे विकसित देश में गीता के संदेश का प्रसार होना भारत के लिए गर्व का विषय है। पिहोवा के श्रद्धालु जापान की धरती पर गीता के संदेश का प्रचार करते हुए भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का गौरव बढ़ा रहे हैं।
डॉ. अवनीत वड़ैच ने कहा कि गीता का ज्ञान विश्व शांति, नैतिक मूल्यों और मानव कल्याण का आधार है। गीता महोत्सव के माध्यम से विश्व के विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के प्रति जागरुकता बढ़ रही है। गीता का संदेश सीमाओं की बाधा नहीं रखता। ये संपूर्ण मानव जाति के लिए प्रेरणास्रोत है। ऐसे आयोजन विश्व बंधुत्व एवं सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जापान में आयोजित कार्यक्रम में चौथे दिन पिहोवा से नरेश शर्मा, तेजेंद्र वालिया, राजकुमार गोस्वामी, राजेंद्र चोपड़ा, राजीव थरेजा, कुलजीत कौर, सालु, बेबी वालिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बने। संवाद