कुरुक्षेत्र। गीता बच्चों को सत्य, अहिंसा, और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करती है। इसके साथ ही ध्यान और ज्ञान योग के सिद्धांत बच्चों को तनाव प्रबंधन और आत्म-नियंत्रण सिखाते हैं, जो आज के प्रतियोगिता के दौर में काफी महत्वपूर्ण है।
यह विचार अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भागवत गीता जयंती समारोह के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन की ओर से आयोजित 18 दिवसीय कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस एसडी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बालिकाओं के समग्र विकास में श्रीमद्भागवत गीता के उपदेशों की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित गीता संवाद कार्यक्रम में डाॅ. श्रीप्रकाश मिश्र ने बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारंभ बालिकाओं द्वारा गीता श्लोकोच्चारण से हुआ।
डाॅ. मिश्र ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता, मानवता के लिए ज्ञान और प्रेरणा का दिव्य ग्रंथ, न केवल भारत बल्कि विश्वभर में जीवन दर्शन का स्रोत है। भगवत गीता का उपदेश बालिकाओं के समग्र जीवन विकास के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देती हैं, जैसे कि निष्काम कर्म, आत्मा की अमरता, क्रोध और मोह से बचाव, और सत्य व धर्म के मार्ग पर चलना।
कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी एवं पार्षद प्रेम नारायण अवस्थी ने किया। आभार ज्ञापन स्कूल की प्रधानाचार्य रिमी बठला ने किया। कार्यक्रम में समाजसेवी जसवीर राणा बतौर अतिविशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।