झांसा के समीप मारकंडा के एसवाईएल में खोले गए गेटों से निकलता पानी।
कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद। झांसा के आसपास के क्षेत्रों में मारकंडा नदी उफान पर रही। ओवरफ्लो होने की कगार पर होने से झांसा, ठस्का मिरांजी, नैसी, अजमतपुर, दुनियां माजरा, मेघा माजरा, जलबेहड़ा, दीवाना, अजराना खुर्द व आसपास के अन्य गांवों में पानी जाने का खतरा बना रहा। हालांकि शाहाबाद में मारकंडा का जलस्तर घटकर तीन दिन बाद रविवार को 13 हजार क्यूसेक तक रहा तो आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली।
ग्रामीणों और भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ कई घंटे बहस होने के बाद प्रशासन को मारकंडा के तीन गेट एसवाईएल में खोलने पड़े, जिनके जरिये करीब 1200 क्यूसेक पानी इस नहर में उतारा गया। एसवाईएल में शनिवार से पंजाब से 800 क्यूसेक पानी आ रहा है।
झांसा के आसपास आधी रात के करीब जलस्तर बढ़ने लगा। सुबह होने तक मारकंडा उफान पर पहुंच गई जिससे ग्रामीण दहशत में आ गए। ऐसे में इस्माईलाबाद व आसपास के भाकियू चढ़ूनी गुट कार्यकर्ता और ग्रामीण भी झांसा पुल पर पहुंचे और एसवाईएल के गेट खोले जाने की मांग करने लगे।
सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग के एक्सईएन मुनीष बब्बर, एसडीओ अनिल कुमार, डीएसपी रामकुमार, झांसा थाना प्रबंधक गुलाब सिंह, थाना इस्माईलाबाद प्रबंधक भी मौके पर पहुंचे और किसानाें को शांत करने का प्रयास किया। किसान एसवाईएल में गेट खोले जाने पर अड़े रहे। प्रशासन की ओर से एसवाईएल के गेट खोले जाने पर किसान महिन्द्र सिंह, सुखदेव सिंह समरा, रविन्द्र सिंह सहित अन्य ने कहा कि ये गेट नहीं खोले जाते तो मारकंडा ओवरफ्लो होकर उनकी फसलों को नष्ट कर देती।
उन्होंने जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने उन लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करने के लिए कहा है और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के कंट्रोल रूम से सहयोग लेने की अपील की है। अभी तक स्थित नियंत्रण में है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने रविवार को रात्रि शाहाबाद के गांव कठुआ और तंगौर का निरीक्षण किया और जलभराव का जायजा किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों के गांवों और शहर की आबादी वाले स्थानों का दौरा करें। ब्रह्मसरोवर पर तैनात एसडीआरएफ की टीम को शाहाबाद भेजा गया। बाढ़ बचाव के लिए भी सभी प्रबंध पुख्ता किए जाने के भी निर्देश दिए।