कुरुक्षेत्र। सत्संग में प्रवचन देते महंत राजेंद्र पुरी। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार में महंत राजेंद्र पुरी ने रविवार के सत्संग में श्रद्धालुओं से कहा कि मानव जीवन बार-बार नहीं मिलता है। अपितु मानव जीवन तो परमात्मा की ऐसी सर्वश्रेष्ठ रचना है, जिसे पाकर इंसान सोचने, बोलने और कर्म करने की शक्ति लेकर पैदा होता है। उन्होंने कहा कि आमजन की ये धारणा कि खाली आए थे और खाली हाथ जाएंगे। यह सत्य नहीं है। मनुष्य धरती पर अपना भाग्य लेकर आता है और अपने द्वारा किए कर्म साथ लेकर जाता है। मनुष्य के धरती से जाने के बाद उसके द्वारा किए कर्मों से ही याद किया जाता है। मनुष्य का जीवन उसके कर्मों के आधार पर टिका हुआ है। आधुनिक युग में हमारे पास सबसे पहले तो रिश्ते नातों के लिए अपने परिवार के लिए समय नहीं है। प्राचीन समय के तरह चार लोग बैठकर परिवार, रिश्तेदार व बच्चों के भविष्य के बारे कोई विचार विमर्श नहीं कर सकते हैं।
एक कमरे में बैठे चार लोग अपने अपने हाथों में आधुनिकीकरण की देन मोबाइल की धुन में बिना कोई बातचीत किए घंटों बिता सकते हैं। हमारे समाज के अनेक रिश्ते जैसे चाचा-चाची, बुआ-फूफा, मौसा-मौसी, ताऊ इत्यादि समाप्त होते जा रहे हैं। आज की पीढ़ी को न रिश्तों की जानकारी है और न ही इनके महत्व का पता है। यह सब हमारे कर्मों का हिस्सा है। जीवन में प्यार और अपनेपन की जगह स्वार्थ और व्यापार ने ले ली। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि हमें अपने कर्मों का सुधार करना चाहिए। धीरे-धीरे अपने बच्चों को धर्म के साथ-साथ रिश्ते नाते, परिवार के बारे में समझना चाहिए। अपने धर्म, हिंदू रीति रिवाज के बारे में बताना चाहिए। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि इस नववर्ष पर हम सबको मिलकर संकल्प लेना होगा कि हम कर्म शक्ति पर ध्यान देंगे और एक प्राचीन भारत का अनुसरण करते हुए अपनी सभ्यता और संस्कृति को अपनाने की राह पर चलेंगे।