निपुण हरियाणा मिशन: कक्षा 1 से 3 को 8 सप्ताह का रेमेडियल प्लान जारी, प्राथमिक शिक्षकों के लिए गणित और भाषा पर विशेष जोर देने के निर्देश जारी
- दिसंबर 2025 में आयोजित सेंसस 2.0 के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद उठाया कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1, 2 और 3 के विद्यार्थियों के लिए विशेष रेमेडियल कार्ययोजना तैयार की गई है। प्राथमिक शिक्षकों के लिए गणित और भाषा पर विशेष जोर देने के निर्देश जारी किए गए हैं। पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए संपर्क गणित किट के तहत मैथ मेज, गणितमाला और बेस टेन ब्लॉक्स जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।
हरियाणा शिक्षा विभाग ने निपुण हरियाणा मिशन के तहत इस योजना को तैयार किया है। यह कदम दिसंबर 2025 में आयोजित सेंसस 2.0 के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद उठाया गया है। इसमें बच्चों की सीखने की क्षमता में कुछ कमियां पाई गई थीं। शिक्षा विभाग के विश्लेषण के अनुसार, कक्षा 2 और 3 के विद्यार्थियों को 99 तक संख्या पहचान और घटाव वाले प्रश्नों में काफी कठिनाई आ रही है। विभाग ने इसे संघर्षशील योग्यता के रूप में चिह्नित किया है।
आठ सप्ताह की रणनीति
शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दो विषयों पर विशेष ध्यान देते हुए 8 सप्ताह का रेमेडियल कार्यक्रम चलाएं। बच्चों को उनके सीखने के स्तर के अनुसार दो समूहों में बांटा जाएगा। पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए संपर्क गणित किट के तहत मैथ मेज, गणितमाला और बेस टेन ब्लॉक्स जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। इसी प्रकार कक्षा 2 के विद्यार्थियों के लिए भाषा के क्षेत्र में शब्द पठन और धाराप्रवाह पठन पर फोकस करने के निर्देश दिए गए हैं।
यहां आ रही दिक्कत
बच्चे अक्सर 3-4 वर्णों वाले शब्दों और संयुक्त अक्षरों जैसे-क्ष, त्र, ज्ञ, श्र को पढ़ने में अटक रहे हैं। कक्षा में शब्द-गूंज (सामूहिक उच्चारण), जोड़ी पठन (साथी के साथ पढ़ना) और शब्द-खोज खेल जैसी 8 प्रमुख गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाया जाएगा। बच्चों को प्रवाह में पढ़ने के लिए प्रेरित करने हेतु पठन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें सबसे सटीक और तेज पढ़ने वाले बच्चे को स्टार रीडर का खिताब दिया जाएगा।
शिक्षकों के लिए जीरो पीरियड का सुझाव
हैंडआउट में स्पष्ट किया गया है कि जो बच्चे पिछली कक्षा की दक्षताओं को अभी तक प्राप्त नहीं कर पाए हैं, उनके लिए जीरो पीरियड में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए। विभाग का मानना है कि यदि संख्या पहचान जैसी बुनियादी नींव मजबूत नहीं हुई, तो बच्चों की रुचि पढ़ाई से खत्म होने लगती है।
बच्चों में पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं ताकि प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों को ज्ञान प्राप्त हा सके। इसके लिए शिक्षकों को भी पाठन का ज्ञान दिया गया है।
सुधीर कालड़ा, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।