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Kurukshetra News: कालेश्वर महादेव मंदिर में हुई श्रावण मास के दूसरे सोमवार की महाआरती

Wed, 12 Aug 2026 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। अतिथियों को सम्मानित करते श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के पदाधिकारी। स्वयं - फोटो : Samvad
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। प्राचीन व ऐतिहासिक श्री कालेश्वर महादेव मंदिर में सावन मास के दूसरे साेमवार की रात्रि को महाआरती का आयोजन किया गया। आचार्य नरेश और मंदिर के पुजारी राकेश शुक्ला के नेतृत्व में वेदपाठी ब्राह्मणों ने पूजा-अर्चना के बाद आरती संपन्न करवाई।
आरती में वैश्य अग्रवाल पंचायत के महासचिव नवकेतन गोयल ने मुख्यातिथि रहे जबकि नगर के प्रमुख समाजसेवी सुरेंद्र सुधा (काका) मुख्य यजमान और नगर पार्षद परमवीर सिंह प्रिंस विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। अतिथियों का श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के मुख्य सलाहकार जयनारायण शर्मा, प्रधान यशेंद्र शर्मा और वरिष्ठ उपप्रधान नितिन भारद्वाज लाली ने वेद मंत्रोच्चारण और शंख ध्वनि के बीच स्वागत किया।
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कालेश्वर तीर्थ में अब होगा स्वच्छ जल का भराव
महाआरती में शामिल मुख्यातिथि नवकेतन गाेयल और मुख्य यजमान सुरेंद्र सुधा (काका) ने कालेश्वर तीर्थ में स्वच्छ जलभराव के लिए ट्यूबवेल लगवाने की घोषणा की। सभा के प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा ने बताया कि कालेश्वर तीर्थ के जीर्णोद्धार का कार्य लगभग पांच वर्ष पहले कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने 50 लाख रुपये की अनुमानित लागत से करवाया था, लेकिन बोर्ड ने तीर्थ में जल भरने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया, जिस कारण तीर्थ बिना जल के ही है। उन्होंने नवकेतन गोयल और सुरेंद्र सुधा का आभार व्यक्त किया।
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बिना नंदी के हैं कालेश्वर महादेव मंदिर
प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा ने बताया कि श्री कालेश्वर महादेव मंदिर में प्रत्येक सावन मास में सोमवार की रात्रि को विशेष महाआरती का आयोजन किया जाता है। यह एकमात्र शिवालय है, जहां पर नंदी स्थापित नहीं हैं। इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा अर्चना करने आते हैं। श्रावण के मास में कालेश्वर की पूजा करने का विशेष महत्त्व है।
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यह है मान्यता
रामपाल शर्मा ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में महाप्रतापी राजा रावण ने भगवान शिव की पूजा कर काल पर विजय का आशीर्वाद मांगा था। तब रावण ने कहा था कि इस आशीर्वाद के समय कोई साक्षी नहीं होना चाहिए। मान्यता अनुसार नंदी को कैलाश पर्वत पर छोड़कर भगवान शिव ने इसी स्थान पर रावण को काल पर विजय का आशीर्वाद दिया था।
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