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मां महागौरी वैभव और सुख-शांति की देवी

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श्रीदेवी कूप भद्रकाली मंदिर में मां का दर्शन करने के लिए लगी श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। श्री दुर्गा अष्टमी के अवसर पर शक्तिपीठ श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में महागौरी की पूजा अर्चना की गई। महागौरी अन्नपूर्णा स्वरूप धन-वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। सांसारिक रूप में इनका स्वरूप बहुत ही उज्ज्वल कोमल, श्वेत वर्ण और श्वेत वस्त्रधारी है। देवी महागौरी को गायन-संगीत प्रिय है और वह सफेद वृषभ यानी बैल पर सवार हैं। मां का दाहिना हाथ अभयमुद्रा लिए हुए हैं और नीचे वाले हाथ में शक्ति का प्रतीक त्रिशूल है। वहीं बायें वाले हाथ में शिव का प्रतीक डमरू और नीचे वाला हाथ भी भक्तों को अभय दे रहा है।
मंदिर की मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने मां को नारियल का भोग लगाया और सफेद फूल अर्पित किए। सुबह से मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी थी। भक्त कन्या पूजन कर रहे थे। पीठाध्यक्ष ने अपने परिवार की कन्या श्लोका पंडित को देवी स्वरूप मानकर पूजन किया। सर्वप्रथम कंजक के चरण फूल की थाली में जल डालकर धोए गए। उसके बाद शृंगार का सामान, चुनरी, पुष्पमाला व फल भेंट किए गए। नई थाली में कंजक को पूरी, हलवा, चना, खीर, पूए का भोग लगाया गया। वहीं भक्तों ने अपने घरों में कन्या पूजन करके आशीर्वाद प्राप्त किया।
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पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि एक वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्या की पूजा करने से व्यक्ति को अलग-अलग फलों की प्राप्ति होती है। जैसे कुमारी की पूजा करने से आयु और बल की वृद्धि होती है। त्रिमूर्ति की पूजा करने से धन और वंश वृद्धि, कल्याणी की पूजा से राजसुख, विद्या, विजय की प्राप्ति होती है। कालिका की पूजा से सभी संकट दूर होते हैं और चंडिका की पूजा से ऐश्वर्य व धन की प्राप्ति होती है। शांभवी की पूजा से विवाद खत्म होते हैं और दुर्गा की पूजा करने से सफलता मिलती है। सुभद्रा की पूजा से रोग नाश होते हैं और रोहिणी की पूजा से सभी मनोरथ पूरे होते हैं।
उन्होंने बताया नवरात्र में नौ देवियों की पूजा का विधान है। मा का आठवां स्वरूप आदिशक्ति महागौरी के पूजा भाव को दर्शाता है। भागवत पुराण के अनुसार मां के नौ रूपों और 10 महाविद्या सभी आदिशक्ति के अंश और स्वरूप हैं, लेकिन महादेव के साथ उनकी अर्धांगिनी के रूप में महागौरी हमेशा विराजमान रहती हैं। महागौरी ने अपनी तपस्या से गौर वर्ण प्राप्त किया था। उत्पत्ति के समय यह आठ वर्ष की थीं। इसलिए इन्हें नवरात्र के आठवें दिन पूजा जाता है।
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अन्नपूर्णा भंडारे में सुबह नौ बजे अनिरुद्ध सैनी, दोपहर 12 बजे जतिन अरोड़ा, तीन बजे राजेश कुमार ,शाम छह बजे अन्नपूर्णा भवन भंडारा नीलम, दिनेश कंसल, तालाब भंडारा शाम छह बजे देवेंद्र वशिष्ट ने आयोजित किया। इस मौके पर नरेंद्र वालिया, डॉ. अनु पॉल, निकुंज शर्मा, हेमराज शर्मा ,शकुंतला देवी, मीना जोशी, स्नेहिल शर्मा, देवांशु शर्मा, देवेंद्र गर्ग, संजीव मित्तल, हितेश, आशीष दीक्षित आदि मौजूद रहे।

कन्या पूजन करते पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा। संवाद- फोटो : Kurukshetra

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