कुरुक्षेत्र। कथा के दौरान मंच पर सम्मान करने पहुंचे श्रद्धालु। संवाद
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा बैरागी सभा की ओर से आयोजित सेक्टर-8 में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कई प्रसंगों पर भक्ति प्रवचन हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने प्रभु की महिमा बताने वाली दिव्य कथा सुनी। कथावाचक ने बताया कि भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र बुधवार की अंधेरी रात में भगवान कृष्ण ने देवकी की आठवीं संतान के रूप में जन्म लिया। श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कोठरी प्रकाशमय हो गया। आकाशवाणी हुई कि विष्णु जी ने कृष्ण जी के अवतार में देवकी के कोख से जन्म लिया है।
कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण को गोकुल में बाबा नंद के पास छोड़ आए। वासुदेव भगवान कृष्ण को लेकर नंद जी के यहां सकुशल पहुंच गए और वहां से नवजात कन्या लेकर वापस आ गए। कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म की सूचना मिली। वह तत्काल कारागार में आया और उस कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटकना चाहा लेकिन वह कन्या उसके हाथ से निकलकर आसमान में चली गई। वह कन्या कोई और नहीं, स्वयं योग माया थीं।
बाबा नंद और उनकी पत्नी मां यशोदा ने कृष्ण का पालन-पोषण किया। राजा कंस ने कृष्ण का पता लगाकर उन्हें मारने की खूब कोशिश की लेकिन सब विफल हुई। कृष्ण को कोई मार नहीं सका। अंत में श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया। राजा उग्रसेन को फिर मथुरा की राजगद्दी सौंप दी। इस अवसर पर संरक्षक हरियाणा बैरागी सभा सुशील चित्रा, पंडित पुरुषोत्तम शर्मा, संदीप नैन, प्रवीण बैरागी, पंडित प्रथम शर्मा, हॉकी खिलाड़ी सुरेंद्र पालड़, रविंद्र सिंह, गीता शर्मा, सुषमा देवी, मीरा सिंह, भावना शर्मा, वंश चित्रा और अन्य श्रोता मौजूद रहे।