कुरुक्षेत्र। कथा के दौरान पंडि़त अनिल शास्त्री के साथ मौजदू श्रद्धालु। विज्ञप्ति
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कुरुक्षेत्र। सेक्टर-सात स्थित श्री शिव शक्ति मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा मंगलवार को भी जारी रही। इस दौरान कथावाचक अनिल शास्त्री ने प्रवचन देने हुए बताया कि मां सती अपने पहले अवतार में, पार्वती देवी सती एवं दक्षायणी थी, जो दक्ष की पुत्री थी और भगवान शिव से विवाह किया था। एक बार, दक्ष ने एक महान यज्ञ किया और उन्होंने भगवान शिव को अपमानित करने के लिए सती को आमंत्रित नहीं किया, फिर भी, सती यज्ञ में भाग लेने गईं। वहां दक्ष ने उनकी उपस्थिति को स्वीकार नहीं किया और भगवान शिव के लिए प्रसाद नहीं दिया। अपने पिता द्वारा पति के अपमान को देखकर सती ने यज्ञ की अग्नि के माध्यम से खुद को प्रज्ज्वलित करके अपना जीवन समाप्त कर लिया। सती की मृत्यु के बाद, भगवान शिव बहुत दुखी और उदास हो गए।
उन्होंने दुनिया को त्याग दिया और हिमालय की चोटियों में गहरे ध्यान में चले गए। इस बीच, राक्षस ताड़कासुर ने देवों को स्वर्ग से बाहर निकाल दिया। देवताओं ने एक योद्धा की तलाश की जो उनके राज्य को वापस उन्हें दिला सके। तब भगवान ब्रह्मा ने कहा, केवल शिव ही इस तरह के योद्धा को जन्म दे सकते हैं, लेकिन वे दुनिया से बेखबर हैं। कहा जाता है कि देवताओं ने सती को बहुत मनाया तब कहीं वह हिमवान और मैना की पुत्री पार्वती के रूप में पुनः जन्म लेने के लिए सहमत हुईं। गहन तपस्या करने के बाद देवी पार्वती शिव को प्रसन्न करने में सफल हुईं और उन्होंने पुत्र कार्तिकेय को जन्म दिया। भागवत कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।