गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित दिव्य गीता सत्संग ने व्यास पीठ से गीता श्री कृष्ण में, श्री कृष्ण गीता में यात्रा को आगे बढ़ाते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि कृष्ण में आनंद नहीं बल्कि कृष्ण ही साक्षात आनंद हैं। आनंद का दूसरा रूप ही कृष्ण है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी का मनाना तभी सार्थक है, जब गो सेवा का संकल्प लिया जाए।
सभी को गो सेवा का संकल्प लेना चाहिए, गाय माता में सभी देवता वास करते हैं, भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गाय चराई थीं। गीता जी को भगवान श्री कृष्ण के मुख से निकली वाणी बताते हुए गीता मनीषी ने कहा कि गीताजी का अध्ययन और श्रवण भाव के साथ करना चाहिए। भगवान भाव के भूखे हैं। जब भाव के साथ गीता जी का अध्ययन और श्रवण किया जाता है तो वह अधिक लाभकारी होता है। गीता भगवान की सरल और दार्शनिक वाणी है। गीता जी में भगवान ने स्वयं अपना आचरण उड़ेला है। इसलिए मानव को गीताजी का अनुसरण करना चाहिए।