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श्रीमद्भागवत सुनने से होते हैं कलियुग के दोष नष्ट : शास्त्री

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कुरुक्षेत्र। पटेल नगर में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते ​​​अनिल शास्त्री। स्वयं
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कुरुक्षेत्र। श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा के तत्वावधान में पालिका पार्क पटेल नगर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मधुर स्वर में अमृतवर्षा की गई। भागवत प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने बताया कि भक्तिदेवी, ज्ञान और वैराग्य की पुष्टि के लिए जो उपाय भगवान नारायण ने आकाशवाणी के माध्यम से बताए, उसका वास्तविक अर्थ खोजते हुए नारदजी बदरीवन पहुंचे और तपस्या करने का विचार करने लगे, तभी वहां उन्हें सनकादि मुनि मिले।
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सनकादि ऋषि, जो ब्रह्माजी के चार मानस पुत्र सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार के नाम से प्रसिद्ध हैं। योगी, बुद्धिमान, विद्वान हैं। देखने में पांच वर्ष के बालक से प्रतीत होते हैं लेकिन पूर्वजों के भी पूर्वज हैं। सदा वैकुंठधाम में निवास करते हैं, निरंतर हरिकीर्तन में लीन रहते हैं। भगवान के लीलामृत का रसास्वादन कर सदा उसी में मस्त रहते हैं और उनके जीवन का एकमात्र आधार भगवद कथा ही है।
नारद जी ने सनकादि मुनियों से पूछा कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की पुष्टि कैसे होगी, तब मुनियों ने बताया कि ऋषियों ने संसार में दुःख निवृत्ति के अनेक मार्ग बताए हैं लेकिन वे सब कष्टदायी हैं।

कुरुक्षेत्र। पटेल नगर में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते अनिल शास्त्री। स्वयं

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