जिलेभर में डीएपी खाद का संकट गहराता जा रहा है। अभाव के कारण अब पुलिस की मौजूदगी डीएपी का वितरण किया जा रहा है। सुबह से ही किसान डीएपी के लिए लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं। उसके बाद कहीं जाकर उनको एक या दो बैग डीएपी के मिलते हैं। सोमवार भी खाद की कमी के चलते किसानों ने प्रशासन के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया था। वहीं किसान लगातार खाद के साथ सल्फर व दवाइयां बेचने वालों दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे है। शाहाबाद में ऐसे तीन खाद विक्रेताओं के लाइसेंस को रद्द किए गए। यहां बता दें जिले भर में डीएपी की 20 हजार एमटी की मांग है, जिस पर अभी तक 12 हजार एमटी ही उपलब्ध हुई है। मंगलवार को जिलेभर में कहीं भी डीएपी नहीं पहुंच पाई, जिस कारण किसानों को बिना खाद के ही निराश होकर वापस लौटना पड़ा। वहीं किसान खाद विक्रेताओं पर डीएपी से मिलते जुलते नाम के ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बेचने का आरोप लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि जिलेभर कई जगह खाद विक्रेता डीएपी की जगह बायो डीएपी किसानों को बेच रहे हैं। इस बायो डीएपी में पर्याप्त मात्रा में (46 प्रतिशत) फास्फोरस नहीं होता है, मगर मिलते जुलते नाम के कारण किसान उसे डीएपी समझकर खरीद कर रहा हैं। किसान मांग कर रहे हैं कि ऐसे दुकानदारों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करके उनके भी लाइसेंस रद्द किए जाए।
शाहाबाद में खाद के साथ सल्फर व दवाइयां बेचने वाले तीन खाद विक्रेताओं पर कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस रद्द कर दिए गए। गुणवत्ता कंट्रोल अधिकारी शशीपाल शर्मा ने तीनों दुकानों के रिकॉर्ड की जांच की तथा आरोप सही पाए जाने पर उनके लाइसेंस रद्द कर दिए।
किसान प्रिंस वडैच ने बताया कि सरकार ने समय रहते स्टॉक का पर्याप्त इंतजाम नहीं किया। किसानों को डीएपी के साथ अन्य दवाइयां व सल्फर खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा हैं। किसानों को दिनभर लाइन में खड़े होने के बाद भी खाद नहीं मिल रही हैं। वहीं कुछ जगह डीएपी से मिलते जुलते नाम के ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर भी किसानों को बेचे जा रहे हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में फास्फोरस नहीं होता हैं। किसान उस पर डीएपी लिखा देखकर खरीद रहे हैं।
सुखविंद्र सिंह ने बताया कि चोरी छिपे सल्फर व दवाइयों के साथ डीएपी की बिक्री हो रही है। सरकार को पहले व्यवस्था बनानी चाहिए थी। अब किसान मजबूरी में सल्फर व अन्य दवाइयों के साथ डीएपी खरीदने को मजबूर हो रहा है।
जोगिंद्र सिंह ने बताया कि खाद विक्रेता रात के समय बाहरी राज्य के किसानों को बेचा रहा हैं। उन किसानों को भी 1450 रुपये प्रति बैग की दर से डीएपी दी जा रही है। इसके अलावा उन किसानों को भी खाद के साथ सल्फर व अन्य दवाइयां बेच रहे हैं, जबकि यहां के किसान सुबह से लाइनों में लगते हैं और उन्हें खाद नहीं दी जा रही हैं।
संजीव कुमार ने बताया कि खाद विक्रेता डीएपी का स्टॉक कर रहे हैं। सोमवार को कनिपला में 500 बैग डीएपी खाद पहुंची थी, जिसकी सूचना पाकर भाकियू ने प्रशासन को देकर उस खाद को किसानों में वितरित कराया। मांग है कि प्रशासन ऐसे दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
मालक सिंह ने बताया कि जिलेभर में खाद की कमी को पूरा करने के लिए सरकार को पहले ही व्यवस्था करनी चाहिए थी। अभी तक जिले में आधे किसानों को पर्याप्त खाद वितरित नहीं हुई हैं। खाद के लिए किसान भटक रहे हैं। खाद की कमी को पूरा करने के लिए प्रशासन व सरकार कोई ठोस रणनीति बनाकर खाद वितरण करें।
जिला गुणवत्ता कंट्रोल अधिकारी शशीपाल शर्मा ने बताया कि मंगलवार को जाखल (फतेहाबाद) से 500 व यमुनानगर से 550 एमटी डीएपी जिले में आनी थी, मगर किसी कारण खाद नहीं पहुंच सकी। आज बुधवार को खाद पहुंच जाएगी। वहीं बायो डीएपी से संबंधित कोई शिकायत उनको नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत मिली और जांच में कोई खाद विक्रेता ऐसे करते पाया गया तो उसका लाइसेंस रद्द किया जाएगा।