कुरुक्षेत्र। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से टेली लॉ व दिशा के माध्यम से लोगों तक न्याय की पहुंच बढ़ाने व उत्तरी पूर्वी राज्यों में इसके प्रचार-प्रसार के लिए रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय कार्यक्रम-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि कानूनी और नैतिक ढांचा मानव कल्याण पर आधारित होना चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री ने सीएससी के माध्यम से टेली लॉ के लिए पीड़ितों का पंजीकरण करने वाले ऑपरेटरों, अधिवक्ताओं, न्याय सहायकों के साथ-साथ न्याय पाने वाले लोगों से भी बातचीत की। इस दाैरान मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी व केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने एक प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया ओर ई-पुस्तकों का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार मानती हैं कि जब तक समाज का हर वर्ग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और न्याय प्राप्ति के प्रति आश्वस्त नहीं होगा, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है। हमारे संविधान की प्रस्तावना हमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का वचन देती है। अनुच्छेद 14, 21 और विशेष रूप से अनुच्छेद 39 के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक को समान न्याय और निशुल्क विधिक सहायता प्राप्त हो। इसी दिशा में, भारत सरकार के न्याय विभाग की ओर से लागू की गई दिशा योजना एक महत्वपूर्ण पहल है और इसके लिए 250 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि इस पहल में युवाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, तकनीकी विकास और जनभागीदारी को नई दिशा देगी। जब वह अपनी शिक्षा पूरी करके अदालत में प्रैक्टिस के लिए जाए तो यह ये ध्यान रखें की अगर कोई जरूरतमंद व्यक्ति उनके पास आता है तो उसे प्रो बोनो के तहत थोड़ी कानूनी जानकारी मुफ्त में ही दे दें। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसी डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करना है जो पूरी तरह से मानव-केंद्रित हो। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। मेघवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से लोगों की सुरक्षा के लिए नए कानून तैयार किए है, जो भारत में न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने और प्रत्येक व्यक्ति को जल्द न्याय दिलाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऑनलाइन केस मैनेजमेंट सिस्टम, ई-कोर्ट, और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई से जल्दी न्याय के लिए कदम उठाए हैं। न्यायालयों में खाली पदों को भरने और न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि अभी भी न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या, जटिल प्रक्रियाएं, और संसाधनों की कमी से संबंधित चुनाैतियां है लेकिन सरकार और न्यायालयों के संयुक्त प्रयास से इनका सामना किया जा रहा है। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह, न्याय विभाग के सचिव नीरज वर्मा, संयुक्त सचिव सुरेश कुमार भी मौजूद थे। संवाद
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46.52 प्रतिशत पुलिसकर्मी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालतों में हो रहे पेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा प्रदेश देश का अग्रणी राज्य है, जिसने इतने कम समय में तीन नए कानूनों को सफलतापूर्वक लागू किया है। इन कानूनों को लागू करने में आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग किया है। ई-साक्ष्य और ई-समन एप सफलतापूर्वक लागू किये हैं। सभी जांच अधिकारियों को एप पर ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अपलोड करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पुलिस थानों, फोरेंसिक प्रयोगशालाओं, न्यायालय कक्षों, कारागारों और बैंकों में दो हजार 145 वीडियो कान्फ्रेंसिंग कक्ष स्थापित किए हैं। लगभग 46.52 प्रतिशत पुलिसकर्मी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालतों में पेश हो रहे हैं। हरियाणा में नये आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन के बाद दर्ज आपराधिक मामलों में दोष सिद्धि दर 82.6 प्रतिशत हो गई है।
कुरुक्षेत्र। टेली लॉ पर अधारित स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी को दिशा व
कुरुक्षेत्र। टेली लॉ पर अधारित स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी को दिशा व