मूनक (करनाल)। आईटीबीपी (इंडियन तिब्बत बॉर्डर पुलिस) के जवान कृष्ण के पार्थिव शरीर का शनिवार को उनके पैतृक गांव मूनक में अंतिम संस्कार किया गया। जब तिरंगे में लिपटकर जवान का शव गांव में पहुंचा तो ग्रामीणों ने भारत माता की जय के नारे लगाए।
घर पर पहुंचे पिता के शव को देखकर बेटी चिल्ला उठी और फफकते हुए कई बार बोली, पापा उठो आपकी गुड़िया आपसे बात करना चाहती है..। जवान की मां और बहन रो-रोकर बेसुध हो गईं। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था।
जवान कृष्ण के पिता राम सिंह ने कहा कि बेटा देश को ही अपना घर मानता था। देश के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले लाल पर मुझे गर्व है। जवान का पार्थिव शरीर आईटीबीपी की बटालियन सुबह 9.15 बजे गांव में लेकर पहुंची। आईटीबीपी ने सात फायर कर सलामी दी और गांव वासियों ने भारत माता की जय शहीद कृष्ण बाजवा अमर रहे के नारे लगाए। करीब 11 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया। विधायक योगेंद्र राणा व सरपंच प्रतिनिधि ने श्रद्धांजलि दी। बुधवार को अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर कृष्ण अपनी टीम के साथ रात करीब 12 बजे गश्त कर रहा था। इसी दौरान पहाड़ियों से पैर फिसलने के कारण उसकी मौत हो गई।
नक्सली क्षेत्र में भी दी थी सेवाएं
51 वर्षीय कृष्ण 1993 में आईटीबीपी में भर्ती हुआ था। उसने करीब 31 वर्ष तक सेवाएं दीं। जवान के 75 वर्षीय पिता राम सिंह ने बताया कि कृष्ण उनके छह बेटों में सबसे बड़ा था। जिसने 10वीं की पढ़ाई के बाद मोटर मैकेनिक का कोर्स किया था। इसी मैकेनिक पद पर इंडियन तिब्बत बॉर्डर पुलिस में भर्ती हुआ। उन्होंने बताया कि कृष्ण ने ज्यादातर सेवा चीन सीमा के बर्फीले व पहाड़ी क्षेत्र में की। इसके अलावा दो बार असम, नक्सलवादी क्षेत्र और हिमाचल के चंबा में भी तैनाती रही।
जवान के नाम पर बनेगा पार्क
सरपंच प्रतिनिधि ओम प्रकाश ने कहा कि मुझे मेरे गांव के जवान कृष्ण पर गर्व है। जो ड्यूटी के दौरान काल का ग्रास बन गया। गांव में सरकार के सहयोग से इनके नाम पार्क व अन्य स्थान का नाम कृष्ण बाजवा के नाम पर करने का प्रयास रहेगा। उन्होंने आईटीबीपी से कृष्ण के बेटे के लिए नौकरी की मांग की। मृतक कृष्ण की शादीशुदा तीन बेटियां व एक बेटा है। अंतिम संस्कार के दौरान मंडल अध्यक्ष अमित राणा, प्रवीण राणा, थाना प्रभारी राजपाल, पानीपत सदर थाना पुलिस व हजारों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।