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यूक्रेन में संकट: फफककर रो पड़ा सूमी में फंसा छात्र, बोला-अब टूट रही आस, मौत के साए में रहने को मजबूर

Fri, 04 Mar 2022 02:42 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, शाहाबाद, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

हमले में रेलवे ट्रैक और सड़कें ध्वस्त होने से छात्र बेबस और लाचार हैं और मौत के साए में रहने को मजबूर हैं। राशन भी खत्म हो गया है और एक समय का खाना खाकर दहशत में एक-एक दिन काट रहे हैं।
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यूक्रेन में बंकर में अपने साथियों के साथ यमनदीप। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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यूक्रेन में फंसे भारतीय वतन वापसी के लिए प्रधानमंत्री से गुहार लगा रहे हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहबाद के कुल 18 छात्र पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए थे, जिनमें आठ छात्र भारत लौट चुके हैं, जबकि 10 छात्र अभी वहां फंसे हुए हैं जिनके परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं सूमी में फंसे विद्यार्थियों का हौसला जवाब दे रहा है। ऐसे में वे बेबस और लाचार होकर मौत के साए में जीने को मजबूर हैं। इस संबंध में वीडियो कॉल पर बात कर एक छात्र रो पड़ा। 

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शाहाबाद के गांव रतनगढ़ का एक छात्र यमनदीप सूमी स्टेट में फंसा है। वीडियो कॉल पर यमनदीप से बातचीत हुई तो वह फफक-फफककर रो पड़ा और कहने लगा कि वतन लौटने की हर एक आस टूट रही है, क्योंकि सूमी के सभी रेलवे ट्रैक और सड़कों को ध्वस्त कर दिया गया है।

इस कारण किसी भी रास्ते से पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में वह डर के माहौल में जी रहा है और ऐसा लग रहा है कि न जाने कब कोई बम उन पर आ गिरे। यमनदीप ने कहा कि अब उसका जीवन तभी बच सकता है, जब यूक्रेन स्वयं उनको रूसी आर्मी के हवाले करे। सूमी से रूस का बॉर्डर मात्र 40 किमी है, जबकि पोलैंड और अन्य बॉर्डर 1400 किमी की दूरी पर है।
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उसने बताया कि उसके पास राशन-पानी भी खत्म हो चुका है। इस समय वे दिन में एक समय का खाना खाकर जीवन बसर कर रहे हैं। उसके साथ देश के कई छात्र हैं। हर कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें बाहर निकालने की मांग कर रहा है। यमनदीप ने कहा कि इस समय जीवन नरक से भी बदतर है और भगवान से हर समय वतन वापसी की दुआ कर रहे हैं।

परिजनों का भी टूट रहा हौसला
सूमी में फंसे यमनदीप से बातचीत के बाद यहां परिजनों का भी हौसला जवाब दे रहा है। अपने बेटे को याद कर पिता हरबीर नरवाल व अन्य परिजन बेहद चिंतित हैं। उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। 

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