दुराचार के आरोपियों ने 11 मार्च को अदालत में होने वाली गवाही से पहले ही लड़की का अपहरण कर दोबारा दुराचार किया।
नाबालिग पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि उसने एएसआई से लेकर डीजीपी तक गुहार लगाई थी, लेकिन कोई तत्परता नहीं दिखाने पर आरोपियों ने दोबारा उसकी मासूम बेटी को हवस का शिकार बना डाला।
यह कहते सरकारी अस्पताल में दाखिल पीड़िता के पिता ने अपनी सुध-बुध को बैठे।
उन्होंने कहा कि सरकार कहती है बेटी बचाओ-बेटी बचाओ...और आरोपियों ने मेरी नन्हीं बेटी का ये हाल बना डाला।
पीड़िता के पिता ने कहा कि अगर पुलिस तत्परता दिखाती तो आरोपी सलाखों के पीछे होते। पिता ने पुलिस पर संवेदनहीनता के आरोप लगाए।
नवंबर 2013 में दसवीं की छात्रा से दुराचार का मामला सामने आया था। पीड़िता के बयान पर थाना सिटी पुलिस ने ग्रेजुएशन कर रहे एक छात्र सहित चार के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
पुलिस मामले में दो नवयुवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जबकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने दो युवकों को हरियाणा पुलिस के दो प्रभावशाली अधिकारियों के दबाव में बाहर निकाल दिया।
इधर, इस मामले में बीते 11 मार्च को पीड़िता की अदालत में गवाही होनी थी, लेकिन नौ मार्च की शाम को आरोपियों ने पीड़िता को घर के बाहर से अपहरण कर लिया और उसके साथ दोबारा दुराचार किया।
जन्मदिन पर पीड़िता की अदालत में गवाही
पीड़िता के शिक्षक पिता के मुताबिक उनकी बेटी का 14 मार्च 1999 को हुआ था। 14 मार्च को वह पूरे 14 साल की होगी। पिता के मुताबिक अपहरण के बाद उसके साथ जो व्यवहार हुआ, उसे बयान करना मुश्किल है। दुराचार के पुराने मामले में 14 मार्च को उनकी बेटी को अदालत में पेश होना है।
डीसी, एसपी, एडीसी और सिटी मैजिस्ट्रेट को शिकायत
पीड़िता के पिता ने बुधवार को लिखित शिकायत की एक-एक प्रति डीसी निखिल गजराज, एसपी वाई पूर्ण कुमार, एडीसी यश गर्ग और सिटी मैजिस्ट्रेट को भी दी है। इसमें जहां सभी आरोपियों के नाम लिखे हैं, वहीं पुलिस पर संवेदनहीनता के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने कहा अज्ञात, पीड़ित पक्ष ने कहा दिए हैं सभी के नाम
जिला पुलिस के प्रवक्ता सुरेश कुमार के मुताबिक लड़की का मेडिकल कराने के बाद दो अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस ने दुराचार का मामला दर्ज कर लिया है। वहीं, पीड़िता के पिता ने बताया कि लड़की के बयान और लिखित शिकायत में सभी आरोपियों के नाम दिए गए हैं।