एसडीएम ने कहा कि सरकार किसानों की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों के नाम, जमीन और फसल के रिकॉर्ड का दुरुपयोग कर सरकारी खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कराह साहिब खरीद केंद्र पर मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर अन्य किसानों की भूमि एवं फसल का फर्जी पंजीकरण करवाकर धान बेचने के प्रयास के मामले में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
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उपमंडल अधिकारी नागरिक डॉ.राहुल कनवरिया का कहना है कि मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों से रिकॉर्ड तलब कर जांच करवाई गई। तहसीलदार पिहोवा से पटवारी रिपोर्ट, कृषि विभाग से पोर्टल पंजीकरण का रिकॉर्ड तथा मार्केट कमेटी पिहोवा से गेट पास एवं खरीद संबंधी विवरण प्राप्त किया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी गौरव कुमार निवासी गढ़ी लांगरी ने गांव शाहपुर एवं जुरासी कलां के पांच खसरा नंबरों की लगभग 4.94 एकड़ भूमि पर धान की फसल का पंजीकरण अपने नाम करवाया था। पटवारी रिपोर्ट के अनुसार संबंधित भूमि पर आरोपी का न तो मालिकाना हक है और न ही वह भूमि उसकी काश्त में है। इन खसरों पर धान की फसल अन्य किसानों की है, जबकि एक खसरा पंचायत भूमि का है। इसी पंजीकरण के आधार पर गत 10 अक्टूबर को कराह साहिब खरीद केंद्र पर एक आढ़ती फर्म के माध्यम से 87 क्विंटल धान का गेट पास कटवाया गया।
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उन्होंने कहा कि मामले में मार्केट कमेटी पिहोवा के सचिव चंद्र सिंह द्वारा पुलिस को शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया गया। थाना सदर पिहोवा का प्रभार देख रहे डीएसपी रोहित ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 319(2) के तहत एफआईआर दर्ज करवाई। डीएसपी ने बताया कि पुलिस अधिकारी संदीप को मामले की जांच सौंपी गई है। वहीं संबंधित गेट पास पर अब तक धान की कोई खरीद नहीं हुई है और न ही कोई भुगतान किया गया है।
खरीफ सीजन के अन्य पंजीकरणों की भी कराई जा रही जांच
एसडीएम ने कहा कि सरकार किसानों की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों के नाम, जमीन और फसल के रिकॉर्ड का दुरुपयोग कर सरकारी खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मामलों में किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। खरीफ सीजन के अन्य पंजीकरणों की भी जांच करवाई जा रही है, ताकि वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।