इस बार पांच सितंबर को मनाई जा रही कृष्ण जन्माष्टमी के दिन दुर्लभ संयोग बन रहा है। जब अर्द्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृषस्य चंद्रमा का पुण्य प्रदायक संयोग बन रहा है।
भारतीय ज्योतिष इसे एक दुर्लभतम संयोग मानता है। यह जानकारी ज्योर्तिविद पंडित महेंद्र शर्मा और पं. सतीश कौशिक ने दी।
उन्होंने बताया कि पुराणों के अनुसार 16 कलाओं के ज्ञाता भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और वर्ष राशि के चंद्रमा के अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। इस प्रकार का अति उत्तम योग वर्षों बाद बन रहा है।
इस योग को ज्योतिष की दृष्टि में अच्छी फसलें होने का कारक भी कहा गया है।इस बार स्थानीय मान अनुसार अष्टमी तिथि शुक्रवार चार सितंबर की रात्रि तीन बजकर 59 मिनट पर लग जाएगी और अगले दिन अर्थात पांच सितंबर शनिवार की रात्रि 2 बजकर 59 मिनट तक रहेगी।
रोहिणी नक्षत्र अर्द्धरात्रि में निशिथ काल (12 बजकर 05 मिनट) तक रहेगा। इस बार तिथि को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रांति नहीं है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी सभी स्थानों पर पांच सितंबर शनिवार को मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि शनिवार को रोहिणी नक्षत्र होने से अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है।
यह भूमि पूजन, गृह प्रवेश के साथ अन्य शुभ कार्यों के लिए बेहद शुभ है। इसके अगले रविवार को गुरु का पूर्व में उदय प्रजा में सुख का संचार, सुभिक्ष और वृष्टि कारक रहेगा।