शर्तों के आधार पर आंदोलन नहीं किए जा सकते। किसानों की मांगें पूरी करवाने के लिए सड़क पर आंदोलन से लेकर संसद तक में भागीदारी बेहद आवश्यक है। राजनीति में न उतरने की शर्त के साथ उनके साथ आंदोलन को लेकर चर्चा की थी, जो सही नहीं थी।
यह दिल्ली व राजस्थान से चर्चा करने के लिए जब दो किसान नेता आए तो आंदोलन की रूपरेखा उससे पहले ही बनाई जा चुकी थी और ऐसे में यह कहना सही नहीं है कि आंदोलन को लेकर उन्हें बुलाया गया था। यह कहना है भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी का। वे वीरवार को जाट धर्मशाला में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
उन्होंने एक दिन पहले ही शंभू बार्डर पर धरनारत किसान नेताओं द्वारा चढूनी को आंदोलन के लिए बुलाने के दावे पर यह कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वे किसी का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि किसानों की मांगों को उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जब किसान आंदोलन चलाया गया था तो सभी से समय रहते चर्चा की गई थी।
यहां तक कि किसान संगठनों की ओर से बनाई गई पांच सदस्यीय कमेटी में चार लोग ऐसे थे जो राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय रह चुके हैं। ऐसे में उनके राजनीति में सक्रिय रहने पर सवाल उठाना सही नहीं है। किसानों की समस्याओं का हल करवाने के लिए सिर्फ मांग रखना ही काफी नहीं है बल्कि इसके लिए कानून बनाने वाली संसद में शामिल होना भी जरूरी है।
चढूनी ने कहा कि आंदोलनरत किसानों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं और वे इनका पूरी तरह से समर्थन कर रहे हैं। यहां तक कि उनकी पंजाब इकाई आंदोलन में शामिल है जबकि हरियाणा में वे इसी आंदोलन के समर्थन में एक दिन तीन घंटे के लिए टोल प्लाजा फ्री करने और अगले दिन ट्रैक्टर मार्च करने का कार्य कर चुके हैं। यहां तक कि ब्रह्मसरोवर पर बुलाई गई बैठक में भी निर्णय लिया गया था कि एकजुटता से ही सफलता की राह आसान होगी।
चढूनी ने चेतावनी दी सरकार किसानों पर अत्याचार बंद करे। किसान अपना अधिकार मांग रहे हैं। उन्होंने मांग रखी कि सरसों की फसल एमएसपी से 1500 से 1800 रुपये कम पर बिक रही है। सरकार भावांतर योजना के तहत किसानों के नुकसान की भरपाई करे। इसके साथ ही गेहूं का भाव 2700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए, अन्यथा भाकियू कोई बड़ा फैसला लेगी। इस मौके पर उनके साथ कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना, प्रवक्ता राकेश बैंस, प्रिंस वड़ैच सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।