कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने सन्निहित सरोवर परिसर के सुंदरीकरण से पहले केडीबी की भूमि पर स्थित बने सैंकड़ों भोरखों (पितृ स्थानों) को जेसीबी से हटाने की कार्रवाई के साथ ही विरोध शुरू हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों ने सैंकड़ों भोरखे केडीबी की मलकीयत वाली भूमि पर बनाए हुए है, जबकि उन्होंने विद्वान ब्राह्मणों और से यह जानकारी लिखित में ली हुई है कि ऐसे निजी पूजनीय स्थान अपनी निजी भूमि पर ही होने चाहिये।
बता दें कि सन्निहित तीर्थ के किनारे ग्रीन बेल्ट जोन में सैंकड़ों भोरखों बनाए हुए हैं। इनमें कुछ भोरखे कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के गठन से भी पहले के हैं, जबकि बड़ी संख्या ऐसों की भी है, जोकि केडीबी के गठन के बाद बनाये गये। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के पहले और तत्कालीन मानद सचिव अशोक सुखीजा ने मार्च 2017 में केडीबी की भूमि से निजी पवित्र स्थल हटाने का नोटिस जारी कराया था, जिसके बाद उक्त जगह पर नोटिस का साइन बोर्ड लगाया गया था, जिसमें तय अवधि के भीतर भोरखे हटाने के निर्देश केडीबी ने जारी किये थे। हालांकि तब यह कार्रवाई कुछ दिन की मोहलत और आश्वासन के कारण कुछ समय के लिये रोक दी गई थी। वहीं एक बार फिर 30 जुलाई 2020 तक यह उक्त जगह से भोरखे हटाने के लिये नोटिस का साइ न बोर्ड लगाया गया था। केडीबी द्वारा तय की गई अवधि के साथ ही कार्रवाई शुरू कर दी गई थी।
सूचना मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और केडीबी प्रशासन का जमकर विरोध किया, लेकिन लोगों का विरोध बढ़ता देख अधिकारियों ने कार्रवाई को रोक दिया। अलग-अलग बिरादरी के लोग इसके बाद विरोध जताते हुए केडीबी कार्यालय पहुंचे और वहां प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। लोगों का कहना है कि सन्निहित सरोवर परिसर स्थित सैंकड़ों भोरखो के साथ हजारों परिवारों की आस्था जुड़ी हुई है। केडीबी की इस कार्रवाई से उन सभी हजारों परिवारों की आस्था को गहरी चोट पहुंची है। उन्होंने कहा कि भोरखों को यहां हटाने के लिए केडीबी द्वारा उन्हें कोई नोटिस भी नहीं दिया गया था। अब जेसीबी द्वारा करीब 60 भोरखों को हटा भी दिया गया है। केडीबी की इस कार्रवाई को लेकर पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता अशोक अरोड़ा ने भी कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई ने लोगों की धार्मिक भावना आहत हुई है। पितर सभी के लिए पूजनीय होते हैं।
आपस में मिल गई भोरखों की ईंटें : संदीप
संदीप कुमार ने कहा कि प्रशासन ने बिना नोटिस के कार्रवाई की है। जेसीबी से उनके भोरखों को तोड़ा गया है, जिनकी इंटें भी आपस में मिल गई हैं। अब कैसे पता लगाएं की हमारे भोरखों की ईंट कौन सी है और दूसरे के कौन सी। संदीप ने कहा कि पहले प्रशासन को उनके भोरखों के लिए अलग से कोई जगह निश्चित करनी चाहिए थी। एक पितर को दोबारा स्थापित करने में हजारों रुपये खर्च होते हैं, ऐसे में गरीब लोगों के लिए अब दूसरी जगह से पितर स्थापित करना मुश्किल है। भोरखों की ईंटें घर के कमरों में नहीं रखी जा सकती।
विधायक ने भोरखों के लिये दूसरी जगह देने का दिया आश्वासन
थानेसर के विधायक सुभाष सुधा ने अपील की है कि वे धैर्य रखें। राज्य सरकार ने केडीबी को प्रमुख तीर्थ सन्निहित तीर्थ के सुंदरीकरण का जिम्मा सौंपा है। यह तीर्थ देश दुनिया से आने वाले लोगों के लिये आस्था का केंद्र है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केडीबी की जगह से वह अपने पूजनीय भोरखों की जगह खाली करें और इसके बाद वह इनके लिये करीब दो कनाल से ज्यादा भूमि मुहैया कराएं ,ताकि सम्मानपूर्वक यह भोरखे वहां विराजमान हो सकें। विधायक ने केडीबी सीईओ कपिल शर्मा को एक सप्ताह तक कार्रवाई रोकने को कहा है, साथ ही केडीबी आफिस में डीसी धीरेंद्र खड़गटा को इस समस्या का हल कराने लिये जमीन तलाश करने को भी कहा है।
केडीबी प्रशासन द्वारा सन्निहित सरोवर के बाहर लगाया गया नोटिस
केडीबी प्रशासन द्वारा कई दिन पहले सन्निहित सरोवर के बाहर भोरखों को यहां से हटाने का नोटिस लगा दिया गया था, जिस पर लिखा था कि कुरुक्षेत्र में दर्रा कलां में सन्निहित सरोवर पर खसरा नंबर 146/2 मिन की 86के-15एम जगह कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की मलकीयत है। इस स्थान की पूर्वी दिशा में दु:खभंजन मंदिर के निकट अज्ञात लोगों द्वारा पितरों के स्थान/भोरखे/सातियां बनाना अनुचित है। संबंधित जनसाधारण को सूचित किया जाता है कि इनको तुरंत हटवाना सुनिश्चित करें अन्यथा इनको 30 जुलाई को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा हटवा दिया जाएगा। लोगों के विरोध के बाद विधायक के कहने पर केडीबी प्रशासन ने अब यहां से अपने भोरखे हटाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।