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एनीमिया मुक्त होगा भारत : अब इलाज के लिए पहुंचने वाले हर व्यक्ति के रक्त की होगी जांच, 100 दिन चलाया जाएगा अभियान

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कुरुक्षेत्र। डॉ. कृष्ण दत्त।
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कुरुक्षेत्र। एनीमिया मुक्त भारत के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले हर व्यक्ति के रक्त की जांच की जाएगी। इसके लिए उपचार के लिए आने लोगों के छह वर्ग बनाए जाएंगे, जिनके रक्त के नमूने लेकर उनकी जांच की जाएगी। अगर कोई एनीमिया से पीड़ित मिलेगा तो उसका तुरंत उपचार शुरू किया जाएगा। विभाग की ओर से जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में 100 दिनों तक यह अभियान चलाया जाएगा। बीते दिवस अभियान को लेकर सीएमओ कार्यालय में जिले के चिकित्सकों और स्टाफ की बैठक हुई थी।
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जांच के लिए विभाग की ओर से छह वर्ग छह महीने से पांच साल तक के बच्चे, पांच से 10, 10 से 19, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली और डब्ल्यूआरए (महिला प्रजनन वर्ग) 18 से 45 साल तक की महिला को शामिल किया गया है। जांच के बाद कोई एनीमिया से पीड़ित पाया गया तो तुरंत उसका उपचार शुरू किया जाएगा। पहले स्तर पर यह अभियान सरकारी अस्पतालों से इन वर्ग के लिए चलाया जाएगा, क्योंकि इस वर्ग में शामिल अधिकतर लोग एनीमिया से पीड़ित है या नहीं उससे पूरी तरह से अनजान है।
विभाग से मिली रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा प्रदेश में नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-चार के मुकाबले 71.7 फीसदी से सर्वे-पांच में एनीमिया में 1.3 फीसदी का सुधार हुआ है, जबकि जिला कुरुक्षेत्र में सर्वे का ग्राफ 63.4 था। इसमें कुछ वर्ग में सुधार हुआ है तो कुछ वर्ग में बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश में डब्ल्यूआरए में पिछले सर्वे 63.1 फीसदी की तुलना में पांचवें सर्वे में 60.6 फीसदी महिलाएं ग्रसित मिलीं। हालांकि गर्भवतियों में 55 फीसदी की जगह 56.5 फीसदी एनीमिया से पीड़ित पाई गईं, जिसमें 1.5 फीसदी बढ़ोतरी हुई।
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15 से 19 वर्ष वर्ग की महिलाओं की स्थिति में सुधार
सर्वे के मुताबिक 15 से 19 वर्ग में महिला-पुरुष में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। महिला वर्ग में यह पिछले सर्वे में 62.7 था, जबकि नए सर्वे में इसमें .4 फीसदी (दशमलव चार) का सुधार हुआ। हालांकि पुरुष वर्ग में .2 फीसदी (दशमलव दो) की बढ़ोतरी हुई। यानी पुरुष वर्ग में पहले जहां 100 में से 29.7 फीसदी एनीमिया से ग्रसित थे, नए सर्वे में .2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ अब 29.9 पुरुष ग्रस्त है। इस वर्ग में महिलाओं के सुधार का एक कारण यह भी रहा कि महिलाओं को आयरन युक्त गोलियां दी जाती है।


क्या है एनीमिया
एनीमिया, शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी या खराब लाल रक्त कोशिकाओं के कारण होता है। इस कारण शरीर के अंगों में ऑक्सीजन पहुंचना कम हो जाता है। इससे थकान, त्वचा में पीलापन, सांस फूलना, सिर घूमना, चक्कर आना या दिल की तेज़ धड़कन शामिल हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि दुनिया भर में 6-59 महीने की उम्र के 40 फीसदी बच्चे, 37 फीसदी गर्भवती और 15-49 साल की उम्र की 30 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं।



कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ के साथ न खाएं आयरन युक्त पदार्थ : दत्त
विशेषज्ञ डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण दत्त ने बताया कि हरियाणा प्रदेश में एनीमिया से ग्रसित होने का बड़ा कारण दूध और उससे बनी वस्तुओं की खपत है। हरियाणा के लोग कैल्शियम युक्त वस्तुओं के साथ आयरन युक्त खाद्य पदार्थों और दवाओं का सेवन करते हैं। उदाहरण के लिए लोग हरी सब्जियों में पनीर डालकर सेवन करते हैं। इससे शरीर को पूरी तरह कैल्शियम और आयरन दोनों ही नहीं मिलते हैं। इसलिए दोनों खाद्य पदार्थों का सेवन अलग-अलग ही करें।


छह जून से शुरू होगा 100 दिन के लिए अभियान : सिंह
जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह का कहना है कि एनीमिया मुक्त भारत के लिए छह जून से जिला स्तर पर 100 दिन के अभियान चलाया जाएगा। इसमें बच्चों से लेकर छह वर्ग के लोगों को शामिल किया है। सभी सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचने वाले इन वर्ग के लोगों का रक्त सैंपल लेकर जांच की जाएगी। हालांकि अन्य कोई भी एनीमिया की जांच और उपचार सरकारी अस्पतालों से करा सकेगा।

कुरुक्षेत्र। डॉ. कृष्ण दत्त।

कुरुक्षेत्र। डॉ. कृष्ण दत्त।

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