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Kurukshetra News: त्रेता में भगवान श्रीराम ने प्राची में किया था पिता का खिचड़ी से श्राद्ध

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कुरुक्षेत्र। शुक्रवार से श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहा है। हर बार की तरह इस बार भी श्राद्ध पक्ष पर देश-विदेश से लोग पितरों के निमित्त गयाजी की तरह कुरुक्षेत्र और पिहोवा में पिंडदान और तर्पण करने के लिए पहुंचेंगे। त्रेता में कार्तिक मास की अक्षय नौवीं पर भगवान श्रीराम ने प्राची तीर्थ पिहोवा में अपने पिता दशरथ का खिचड़ी से श्राद्ध किया था।
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पदम पुराण में इस घटना का उल्लेख भी मिलता है, वहीं द्वापर के अंत में श्रीकृष्ण के कहने पर पांडव युधिष्ठिर ने पापांतक तीर्थ पर महाभारत युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए योद्धाओं के आत्मिक शांति के लिए पिंडदान कराया था। सन्निहित और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर पुरोहित वर्ग तर्पण व पिंडदान कराते हैं। श्राद्ध पक्ष के 16 दिनों में इससे जुड़ा कारोबार भी लाखों का रहता है। वहीं यजमानों से पुरोहितों को दान में अच्छी कमाई होती है। पिहोवा में जहां तीर्थ पुरोहितों की 200 से ज्यादा दुकानें हैं वहीं सन्निहित और ब्रह्मसरोवर पर भी तीर्थ सदन में 30 से ज्यादा पुरोहित हैं।
पुरोहितों के मुताबिक श्राद्ध पक्ष में औसतन पुरोहित को पांच से 10 हजार रुपये तक रोजाना यजमानों से तर्पण एवं पिंडदान आदि कराने पर दक्षिणा के रूप में मिलते हैं। इस तरह पूरे श्राद्ध पक्ष के दौरान कुरुक्षेत्र व पिहोवा के तीर्थों पर दो करोड़ रुपये से ज्यादा दान-दक्षिणा के रूप में चढ़ावा आता है। अमावस्या पर यह आंकड़ा कई गुना बढ़ जाता है। अमावस्या पर औसतन 20 से 30 लाख रुपये का दान कुरुक्षेत्र व पिहोवा के सरोवरों पर होता है।
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सरस्वती तीर्थ पुरोहित विनोद पचौली ने बताया कि गयाजी व हरिद्वार की तरह पिहोवा व सन्निहित सरोवर के पुरोहितों के पास भी सैकड़ों साल पुरानी बहियां हैं। पुरोहित के पास 250 से 300 साल का रिकॉर्ड दर्ज है। यहां गुरु गोबिंद सिंह, महाराजा रणजीत सिंह, बाबा बड़भाग सिंह के आने के प्रमाण भी दर्ज है। इसके अलावा कई बॉलीवुड कलाकार, गायक और राजनेता भी उनके यजमान हैं। यहां सुनील दत्त, संजय दत्त, गुरदास मान, रणजीत, सोनू सूद, राज बब्बर पूजा करवा चुके हैं। इसके अतिरिक्त अटल बिहारी वाजपेयी, सीएम मनोहर लाल, पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह कई राजनेताओं के परिवार की वंशावली दर्ज है।


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बाबा फतेह सिंह भी परिवार के साथ आ चुके हैं यहां
बही के मुताबिक बचपन की अवस्था में शहादत से पहले गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादे बाबा फतेह सिंह अपने परिवार के साथ यहां आ चुके हैं। बही में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक गुरु गोबिंद सिंह का संबंध सोढ़ी साहिबजादा वंश से रहा। सोढ़ी साहिबजादा वंश से माई साहिब देवा, बीबी महाकौर और बीबी किशन कौर यहां मुगलकाल में बैसाख के ग्रहण के स्नान के लिए आईं थी, तब बाबा फतेह सिंह भी उनके साथ यहां आए थे। इसके प्रमाण बही में दर्ज हैं। बाद में मुगलों ने धर्म परिवर्तन न करने की जिद पर अड़े बाबा फतेह सिंह को सरहिंद की दीवारों में चिनकर शहीद कर दिया गया था।


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गयाजी में प्रथम पूजित पुथु की वेदी
विनोद पचौली के मुताबिक सरस्वती तीर्थ पर पिंडदान का पुण्य गयाजी के समान है। यदि कोई व्यक्ति गयाजी जाकर पिंडदान करेगा तो वहां सर्वप्रथम पृथु वेदी पर ही पिंडदान होता है। गयाजी में भी पृथु वेदी पर तर्पण के बाद श्राद्ध की अगली पूजा शुरू होती है।

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यज्ञमान अपनी खुशी से जो दे स्वीकार : पवन शर्मा
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सन्निहित तीर्थ के पुरोहित पवन शर्मा पौनी का कहना है कि यजमान अपनी खुशी से जो देता है पुरोहित उसे स्वीकार करते हैं। यहां यजमान को परिवार के रूप में देखा जाता है। पुरोहित का अर्थ ही हित करने वाला होता है। पुरोहित कमाई के लिए नहीं, बल्कि सेवा के रूप यजमान का काम कराते हैं। बदले में यजमान दान दक्षिणा देता है। यह व्यवस्था प्राचीन काल से ही चली आ रही है।
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