महाभारत में असत्य पर सत्य की जीत हुई थी। इस महाभारत में अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंसे और बाहर नहीं निकल पाए। इसी प्रसंग का मंचन नृत्य नाटिका में किया गया।
इसमें दिखाया गया कि किस प्रकार सुभद्रा सो जाती हैं और अभिमन्यु चक्रव्यूह को भेदने की कला नहीं सीख पाते। यदि सुभद्रा जागती रहतीं, तो अवश्य ही अभिमन्यु चक्रव्यूह भेद देते। अभिमन्यु के चक्रव्यूह के दृश्यों को फिर से जीवंत किया कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती समारोह की सांस्कृतिक संध्या में अनवेषणा सोसाइटी फॉर परफोर्मिंग आर्ट के कलाकारों ने।
कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती समारोह में वीरवार देर शाम पुरुषोत्तमपुरा बाग में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, पर्यटन विभाग हरियाणा और सूचना, जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा के तत्वाधान में सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई।
इसमें संगीता शर्मा के निर्देशन में अभिमन्यु नृत्य नाटिका पेश की गई। इसका शुभारंभ राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने किया। इसका आगाज एएसपीए की निर्देशिका संगीता शर्मा के नाटक अभिमन्यु नृत्य नाटिका के शीर्षक "अंतत: तेरहवां दिन" से हुआ। नृत्य नाटिका में कलाकार सुभाशीष, अभिनव मुखर्जी, अमित हलदर, अदिति चटर्जी, अनुराग, आशीष कुमार, निखिल, उमेश, शुभम, पुनीत, सुरभि कपूर, सुरभि दयानी, विदुषी गुप्ता, श्रेष्ठा ने अभिनय किया।
नाटक में लाइटिंग डिजाइन अतुल मिश्रा, कोरियोग्राफी शुभाशीष दे, ड्रेस डिजाइनिंग भारती डंग ने की। इस नृत्य नाटिका में अर्जुन की पत्नी, अभिमन्यु की मां और भगवान श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा की ममता का भी मार्मिक मंचन किया गया।
इसमें दिखाया गया कि मां सुभद्रा की कोख में ही अभिमन्यु के जन्म और मृत्यु का कारण बनी। मां सुभद्रा बीच में न सोती तो अभिमन्यु चक्रव्यूह मेें मारे नहीं जाते।