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Kurukshetra News: प्रदेश के सभी 72 गुरुघरों की संभाल की तैयारी में एचएसजीपीसी

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कुरुक्षेत्र। भले ही प्रदेश में वर्ष 2014 से एडहॉक कमेटी अस्तित्व में आ गई थी और समय अनुसार कई नेतृत्व भी बदलता रहा लेकिन आज तक सभी गुरुघरों की संभाल अपने अधीन नहीं ली जा सकी है। आज भी 24 गुरुघर एचएसजीपीसी के दायरे से बाहर हैं। इनमें दो गुरुघरों का स्थायी समितियां तो दो का प्रबंधन कार सेवा के जरिए किया जा रहा है लेकिन अब नवनिर्वाचित कमेटी सभी गुरुघरों का प्रबंध संभालने को तैयार है और इस रणनीति पर कार्य भी शुरू कर दिया गया है।पहले स्थायी कमेटी व कार सेवा से जुड़े संतों के पास कार्यकारिणी पहुंचेगी, जो गुरुघरों के प्रबंध के लिए कमेटी से जुड़ने का आह्वान करेगी। संगत को साथ लेकर आपसी सहमति के साथ इस कदम को आगे बढ़ाया जाएगा।
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कमेटी मुख्यालय पर चर्चा में जगदीश सिंह झींडा ने बताया कि प्रदेश के सभी 72 गुरुघरों की बेहतर संभाल हो, इसके लिए अलग कमेटी बनाने के लिए संघर्ष किया गया था। आज संघर्ष का परिणाम आया है तो प्रयास किया जाएगा कि सभी गुरुघरों का प्रबंधन कमेटी द्वारा ही संभाला जाए। इस दिशा में कार्य योजना तय की जा रही है। वर्तमान तक कमेटी 48 गुरुघरों की ही सेवा संभाले हुए है।
झींडा ने बताया कि कमेटी हर गुरुघर के प्रबंधन तक पहुंचेगी, जहां न केवल कमेटी से जुड़ने का आह्वान किया जाएगा बल्कि गुरुघरों के प्रबंधन के साथ-साथ स्कूल, अस्पताल व अन्य संगत हित में कार्य करने का भरोसा भी दिया जाएगा। सभी की सहमति के साथ ही इस सोच को परवान चढ़ाया जाएगा और संगत की उम्मीद के अनुसार कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब बड़े प्रबंधन के साथ जुड़ा जाता है तो और भी बेहतर कार्य होने की उम्मीद बढ़ जाती है।
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गुरुघरों की सेवा की ही जिम्मेदारी
झींडा ने कहा कि कमेटी किसी प्रकार की राजनीति करने के लिए नहीं बल्कि गुरुघरों की बेहतर संभाल व संगत के हित में कार्य करने की जिम्मेदारी है। शुरुआत में ही इसी केंद्र बिंदु के दृष्टिगत कार्य योजना बनाई जा रही है और जल्द इसके परिणाम भी दिखाई देने लगेंगे। उनका कहना है कि संगत गुल्लकों में जो दान करती है, उसका उपयोग सही जगह पर हो, यही सबसे बड़ा उद्देश्य है। यही कारण है कि वीआईपी कल्चर को भी खत्म किया जा रहा है।
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