कुरुक्षेत्र। होली पर्व 2 मार्च को हर्षोल्लास व धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए चारों ओर उत्साह दिखाई देने लगा है। होली के अगले ही दिन 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय समयानुसार दोपहर बाद तीन बजकर 20 मिनट से ग्रहण स्पर्श होगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित पवन शर्मा ने बताया कि ग्रहण के दौरान होलिका दहन नहीं किया जाता। इससे पहले 2 मार्च को होलिका दहन होगा। हरियाणा का विशेष त्योहार फाग यानी रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा। चंद्रग्रहण पूर्वी यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी दक्षिणी अमेरिका, पेसिफिक, अटलांटिक, आर्कटिक और अंटार्कटिक, हिंद महासागर आदि में खग्रास रूप में दिखाई देगा।
भारतीय समयानुसार खग्रास प्रारंभ चार बजकर 34 मिनट, पांच बजकर तीन मिनट तक मध्य रहेगा, खग्रास की समाप्ति पांच बजकर 32 मिनट पर और ग्रहण की समाप्ति 6 बजकर 47 मिनट पर होगी। ग्रहण का लगभग 3 घंटे 27 मिनट का समय रहेगा। ग्रहण का सूतक 3 मार्च को प्रात: 6 बजकर 20 मिनट से भारतीय समयानुसार शुरू होगा। ग्रहण समाप्त होते ही सूतक की भी समाप्ति मानी जाती है। यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षण व सिंह राशि के समय घटित हो रहा है। अत: इस नक्षण के जातक और सिंह राशि के जातकों के लिए अधिक अशुभ रहेगा।
दान, स्नान, जाप और गुरुमंत्र का विशेष महत्व
ग्रहण काल में गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। किसी भी पवित्र नदी या तीर्थ पर जाकर भी स्नान किया जा सकता है। इस दिन व्यक्ति को दान करना चाहिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को ध्यान देने की जरूरत है। ग्रहण के दौरान बाहर निकलने से बचें। ग्रहण की किरणें अशुभ मानी जाती हैं।
सुबह 4:56 बजे तक भद्रा का वास
ज्योतिषाचार्य डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है। वैदिक पंचांग के अनुसार सोमवार 2 मार्च को चतुर्दशी तिथि शाम 5:18 बजे तक रहेगी। उसके तुरंत बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शास्त्रों के नियमानुसार होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है लेकिन इस बार पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का आगमन भी हो रहा है। इसके तहत भद्रा का लंबा साया 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से लेकर पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च की भोर सुबह 4:56 बजे तक भद्रा का वास रहेगा।
जब पूरी रात भद्रा हो तो शास्त्रों में भद्रा पुच्छ (भद्रा का पूंछ वाला भाग) में कार्य करने का विधान है। इस साल दहन का सबसे शुभ समय और शुभ मुहूर्त रात 12:50 से आधी रात 02:02 बजे तक की अवधि एक घंटा 12 मिनट तक रहेगा। यदि पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण हो तो उससे पूर्व रात्रि में भद्रारहित समय में होलिका दहन करना चाहिए। निर्णयसिंधु में कहा गया है कि पूर्णिमा को ग्रहण हो तो उससे पूर्व रात्रि में जिस समय भद्रा न हो, उसमें होलिका का दहन करें। मंगलवार 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है।
होली 2026 की संपूर्ण समय सारणी
2 मार्च : होलिका दहन - रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक
3 मार्च : चंद्र ग्रहण - दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक
3 मार्च : सूतक काल - सुबह 06:20 बजे से शुरू
4 मार्च : रंगों की होली - सुबह से, यही धुलेंडी का दिन