श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयुर्वेद दिवस एवं भगवान धन्वंतरि के अवतार दिवस पर अष्ट कुंडीय यज्ञ आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यातिथि के रूप में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने शिरकत की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग के पूर्व सदस्य वैद्य राकेश पंडित उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुष विवि के कुलपति प्रो. बलदेव कुमार धीमान ने की। आयुष विवि परिसर में सुबह साढ़े 11 बजे अष्ट कुंडीय यज्ञ का शुभारंभ हुआ। सवा 12 बजे स्वामी ज्ञानानंद महाराज और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा पहुंचे। जैसे ही स्वामी ज्ञानानंद महाराज काय कुंड में आहुति डालने पहुंचे, यहां उनके लिए विशेष कुर्सी की व्यवस्था की गई थी, लेकिन स्वामी ज्ञानानंद ने कुर्सी को हटवाकर आसन बिछवाया और यज्ञ पूरे होने तक आसन पर बैठकर ही आहुति डाली।
इस अवसर पर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भारत भूमि अपनी कोख में दिव्यता समेटे हुए है। इस भूमि पर महान संतों, ऋषियों और महापुरुषों ने जन्म लिया। इस माह से पूर्व भगवान वाल्मीकि और गुरु नानक देव का पूरे देशभर में अवतरण दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया और आज आयुष विश्वविद्यालय के परिसर में आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि की जयंती मना रहे हैं। कुलपति डॉ. बलदेव कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस 2016 से पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है।
मुख्य वक्ता वैद्य राकेश पंडित ने कहा कि भारत में लगातार ऋषि, संतों और महापुरुषों की परंपरा चली है, जिन्होंने प्रकृति और मनुष्य के बीच क्या संबंध है इस बारे में विश्व को अवगत कराया।
मंच का संचालन डॉ. अनामिका ने किया। कुलसचिव नरेश कुमार भार्गव ने कार्यक्रम उद्घाटन का प्रस्तावना भाषण पढ़ा। इस अवसर पर मुख्यातिथि स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने विश्वविद्यालय में ई-पुस्तकालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर डॉ. मनीष सैनी, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. आशीष मेहता, केडीबी सदस्य विजय नरूला, आयुर्वेदिक कॉलेज प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना, राजेंद्र सिंह, डॉ. सतीश वत्स, डॉ. रजनीकांत, डॉ. कृष्ण कुमार जाटयान आदि उपस्थित रहे।
उधर, श्रीकृष्ण राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में शिक्षकों ने आयुर्वेद दिवस मनाया। इस अवसर पर हवन यज्ञ आयोजित किया गया, जिसमें कॉलेज के शिक्षक डॉ. अशोक राणा, डॉ. मंगल, डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. मनोज तंवर, डॉ. शंभू दयाल शर्मा, डॉ.सुधीर व डॉ. रणधीर ने आहुति डाली। इस दौरान शिक्षकों ने भगवान धन्वंतरि की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए।